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2 घंटे पहले
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पाकिस्तान ने अपने नए संघीय बजट में एक अहम फैसला लेते हुए मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोडक्ट्स यानी सेनेटरी पैड और गर्भनिरोधकों पर लगने वाले सेल्स टैक्स को हटा दिया है। इन उत्पादों पर पहले 18 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसे अब घटाकर शून्य कर दिया गया है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले उन कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का जश्न मनाया है, जिन्होंने इस तथाकथित 'पीरियड टैक्स' या 'पिंक टैक्स' के खिलाफ अभियान चलाते हुए कई साल बिताए हैं।
क्यों अहम है यह फैसला
इस कदम के साथ ही पाकिस्तान अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने पीरियड से जुड़े उत्पादों को जरूरी वस्तु का दर्जा दिया है। भारत भी 2018 में पीरियड टैक्स को समाप्त कर चुका है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि पीरियड कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए सेनेटरी पैड जैसे जरूरी उत्पादों पर टैक्स लगाना महिलाओं और लड़कियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालता था।
कीमतों पर कितना असर पड़ता था
पहले इन उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता था, वहीं कच्चे माल पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी और अन्य करों के कारण इनके दाम और ऊपर चढ़ जाते थे। यूनिसेफ के मुताबिक, इन्हीं करों की वजह से सेनेटरी पैड की कीमतें करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती थीं। इससे कम आय वाले परिवारों की महिलाओं और लड़कियों के लिए ये उत्पाद खरीदना मुश्किल हो जाता था। कई महिला अधिकार समूहों का कहना था कि इस वजह से एक जरूरी स्वास्थ्य उत्पाद को भी विलासिता की वस्तु की तरह देखा जाने लगा था।
गर्भनिरोधकों पर भी राहत
पाकिस्तानी सरकार ने गर्भनिरोधकों पर लगने वाला टैक्स भी हटा दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे परिवार नियोजन को बढ़ावा मिलेगा और बढ़ती आबादी की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह फैसला नागरिकों पर आर्थिक बोझ घटाने और स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने संसद में कहा कि महिलाओं के लिए पिंक टैक्स खत्म करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। वहीं वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि पीरियड से जुड़े उत्पाद महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और समाज में उनकी भागीदारी के लिए बेहद जरूरी हैं।
कानूनी लड़ाई की बड़ी भूमिका
इस बदलाव के पीछे अदालती लड़ाई की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। साल 2025 में दो युवा वकीलों ने अदालत में याचिका दायर कर दलील दी थी कि पीरियड उत्पादों पर टैक्स लगाना महिलाओं के साथ भेदभाव है और यह संविधान में मिले समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। इस मामले ने पूरे देश में बहस छेड़ दी और सरकार पर दबाव बढ़ता गया।
सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया और पीरियड पॉवर्टी को लेकर जागरूकता फैलाई। हजारों लोगों ने इस मांग के समर्थन में हस्ताक्षर किए। उनका कहना है कि टैक्स हटने से न सिर्फ कीमतें घटेंगी, बल्कि पीरियड से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने में भी मदद मिलेगी।
अभी खत्म नहीं हुई लड़ाई
हालांकि संगठनों का मानना है कि यह संघर्ष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पाकिस्तान में अब भी सेनेटरी उत्पाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। इसके अलावा देश में पीरियड हाइजीन से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी अब तक कमजोर है।
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