दक्षिण एशिया में भारत की ताकत का लोहा मान रहा पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते पर मंत्री ने स्वीकारी हकीकत विश्व 3 घंटे पहले 6
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारत दक्षिण एशिया में एक बेहद शक्तिशाली राष्ट्र है और भौगोलिक स्थिति के कारण वह पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के कड़े रुख के बाद पड़ोसी देश में अब पानी के संकट को लेकर खलबली मची हुई है।

सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की लाचारी

नदियों के पानी ने आखिरकार पाकिस्तान को उसकी हकीकत और ताकत का अंदाजा करा दिया है। सिंधु जल समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लंबे समय तक दुष्प्रचार और रोना-धोना करने के बाद, अब पाकिस्तानी सरकार के एक मंत्री ने यह मान लिया है कि भारत दक्षिण एशिया में सबसे मजबूत स्थिति में है। इस स्वीकारोक्ति ने पाकिस्तान के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिनमें वह भारत के कूटनीतिक फैसलों को कमतर आंकने की कोशिश करता था। शहबाज शरीफ सरकार में योजना और विकास मंत्री अहसान इकबाल ने एक हताशा भरे लहजे में माना है कि भारत के पास वह सामर्थ्य है जिससे वह चाहे तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था को घुटनों पर ला सकता है।

भारत के पास है पानी का बड़ा हथियार

पाकिस्तानी मंत्री अहसान इकबाल ने अपनी बात रखते हुए इस कड़वे सच को स्वीकार किया कि भारत भौगोलिक रूप से एक ऊपरी देश है। वहां से बहने वाली नदियां ही पाकिस्तान की जीवन रेखा हैं। इकबाल ने कहा कि भारत इसका पूरा लाभ उठा सकता है और जरूरत पड़ने पर पानी को पाकिस्तान के खिलाफ एक घातक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। पाकिस्तान को अब यह डर सताने लगा है कि यदि उसने अपनी नापाक गतिविधियों और आतंकवाद को समर्थन देना जारी रखा, तो भारत नदियों के प्रवाह को नियंत्रित करके पाकिस्तान को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसा सकता है। मंत्री ने यह भी माना कि पूरे दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए भारत की भूमिका अपरिहार्य है और भारत की सहमति के बिना इस क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है।

समझौते पर भारत का कड़ा रुख और पाकिस्तान की चिंता

साल 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता दशकों तक पाकिस्तान के लिए एकतरफा फायदेमंद साबित होता रहा। इस समझौते के तहत सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का अधिकांश पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। हालांकि, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया और इस समझौते को रद्द करने की दिशा में कदम उठाए। भारत की ओर से समझौते में बदलाव के लिए भेजे गए नोटिसों ने इस्लामाबाद में हड़कंप मचा दिया है। भारत अब झेलम और चिनाब जैसी नदियों पर अपनी जलविद्युत परियोजनाओं, विशेषकर रैटल और किशनगंगा, के निर्माण कार्य में तेजी ला रहा है। भारत अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत कर रहा है, जिससे पाकिस्तान को मिलने वाले अतिरिक्त पानी पर स्वतः ही लगाम लग जाएगी।

पाकिस्तान के सामने गहराता जल संकट

पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था उसके कृषि क्षेत्र पर टिकी है, जो सिंधु नदी तंत्र पर पूर्णतः निर्भर है। यदि भारत अपने अधिकारों का पूरी तरह उपयोग करते हुए पानी को बांधों में रोकता है या उसका रुख मोड़ता है, तो पाकिस्तान को निम्नलिखित विनाशकारी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:

  • सूखा और भुखमरी: पाकिस्तान के पंजाब और सिंध जैसे प्रमुख प्रांत पूरी तरह बंजर होने की कगार पर आ सकते हैं, जिससे देश में अनाज का भारी संकट उत्पन्न हो जाएगा।
  • बिजली का संकट: पाकिस्तान के कई बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट पानी की कमी के चलते बंद हो सकते हैं, जिससे पूरा देश अंधेरे में डूबने के कगार पर पहुंच जाएगा।
  • आर्थिक तबाही: पहले से ही गंभीर आर्थिक बदहाली और कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए कृषि और उद्योग जगत का ठप होना उसकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने जैसा होगा।

नदियों ने दिखाई पड़ोसी को उसकी जगह

पाकिस्तानी मंत्री अहसान इकबाल का यह बयान महज एक राजनीतिक टिप्पणी भर नहीं है, बल्कि यह उस छटपटाहट का प्रमाण है जो भारत की मजबूत कूटनीतिक और जल-प्रबंधन नीतियों के कारण पैदा हुई है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। भारत की ओर से निकलने वाली नदियों ने अपने पानी के माध्यम से पड़ोसी देश को उसकी वास्तविक औकात याद दिला दी है। भारत के सख्त रुख ने न केवल पाकिस्तान के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब पाकिस्तान की किसी भी नापाक हरकत का जवाब उसके अस्तित्व से जुड़े संसाधनों पर नियंत्रण के जरिए दिया जाएगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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