पाकिस्तान में बड़ा राजनीतिक संकट: खैबर पख्तूनख्वा में लागू हुई इमरजेंसी, इमरान खान की पार्टी की सरकार बर्खास्त विश्व 6 घंटे पहले 2
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए आपातकाल लागू कर दिया है, जिससे तहरीक-ए-इंसाफ की प्रांतीय सरकार भंग हो गई है।

पाकिस्तान में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम

रविवार को पाकिस्तान की सियासत में उस समय एक बड़ी हलचल देखने को मिली, जब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लगाने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रांत में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और आतंकी हमलों की बढ़ती तादाद का हवाला देते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को भंग कर दिया है। यह आपातकालीन आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

राष्ट्रपति के आधिकारिक आदेश के अनुसार, राज्य के मुख्यमंत्री, सभी प्रांतीय मंत्रियों, विशेष सहायकों, सलाहकारों और महाधिवक्ता को तत्काल अपने पदों से हटना होगा। यह कार्रवाई पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234(1) के अंतर्गत की गई है। इस फैसले के बाद, अब प्रांत के तमाम महत्वपूर्ण विधायी और कार्यकारी अधिकार सीधे तौर पर संघीय सरकार के नियंत्रण में आ गए हैं।

आपातकाल के पीछे की वजह

इस फैसले के पीछे मुख्य तर्क प्रांत में सुरक्षा स्थिति का लगातार खराब होना बताया जा रहा है। राष्ट्रपति की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी गतिविधियों में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता के जीवन और उनकी संपत्ति को गहरा खतरा उत्पन्न हो गया है। सरकार ने यह भी उल्लेख किया है कि सुरक्षा एजेंसियों, सरकारी प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर लगातार हमले हो रहे हैं।

इसके साथ ही, प्रांत की सरकार पर यह आरोप भी मढ़ा गया है कि वह कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने में विफल रही है। प्रांत के राज्यपाल की ओर से भेजी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह से डगमगा गई है और मौजूदा सरकार संविधान की मंशा के अनुसार काम करने में असमर्थ साबित हुई है।

मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के मार्च के दौरान हुआ निर्णय

यह अप्रत्याशित कदम ऐसे समय उठाया गया है जब खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी इमरान खान की रिहाई और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने की मांग के समर्थन में एक बड़े विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं। यह मार्च 4 अक्टूबर को लक्की मरवत से शुरू हुआ था और प्रदेश के विभिन्न जिलों में आगे बढ़ रहा था। मुख्यमंत्री अफरीदी ने शनिवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने राज्य की समस्याओं के निपटारे के लिए सैन्य अभियान को कोई समाधान मानने से साफ इनकार किया था।

प्रारंभिक योजना के तहत PTI इस मार्च को इस्लामाबाद तक ले जाने और वहां धरना आयोजित करने की तैयारी में थी। हालांकि, संघीय सरकार ने प्रदर्शनकारियों को राजधानी की सीमा में घुसने से रोकने की सख्त चेतावनी दी थी। इस कारण इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और प्रमुख मार्गों को शिपिंग कंटेनर रखकर पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है।

इस बीच, पेशावर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी और PTI के अन्य 28 नेताओं की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटाने से मना कर दिया है। अदालत ने इन नेताओं की अंतरिम जमानत याचिकाओं को डिवीजन बेंच के पास स्थानांतरित कर दिया है। अब पेशावर हाईकोर्ट इन नेताओं की गिरफ्तारी से जुड़े मामलों पर 20 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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