पाकिस्तान में जारी अशांति की असली जड़ क्या है, पूर्व राजनयिक ने अमेरिका-ईरान कनेक्शन पर किया बड़ा खुलासा भारत 2 घंटे पहले 2
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और बलूचिस्तान में मची अफरा-तफरी के बीच यूक्रेन में भारत के पूर्व राजदूत विद्या भूषण सोनी ने देश के अंदरूनी संकट और उसकी विफल कूटनीति पर गंभीर टिप्पणी की है।

पाकिस्तान चौतरफा संकट में फंसा

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, उसके बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यूक्रेन में भारत के पूर्व राजदूत विद्या भूषण सोनी ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान आज के समय में हर तरफ से संकट में घिर गया है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बचाने की कोशिशों में लगा पाकिस्तान आर्थिक रूप से पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जिसका सीधा असर वहां की जनता पर पड़ रहा है। जनता में सरकार के प्रति भयंकर नाराजगी और हताशा है। विद्या भूषण सोनी के अनुसार, पाकिस्तान को यह गलतफहमी थी कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर न केवल अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि चमका लेगा बल्कि भारी मात्रा में डॉलर की मदद भी हासिल कर लेगा, लेकिन उसकी यह उम्मीद पूरी तरह से धराशायी हो गई है। फंड के अभाव में वहां की स्थिति और भी भयावह होती जा रही है।

विद्रोह की आग और जनता का गुस्सा

पूर्व राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि देश भर में अलग-अलग समूह लामबंद हो रहे हैं। इसमें बलूच संगठनों से लेकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आम नागरिक तक शामिल हैं, जो अब खुलकर सड़कों पर आकर सरकार का विरोध कर रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान की सरकार दुनिया के सामने अपनी एक झूठी शांतिपूर्ण छवि पेश करने का भरसक प्रयास कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि देश के भीतर व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा चुकी है। विद्या भूषण सोनी ने कहा, 'पाकिस्तान की जनता को अब यह स्पष्ट हो चुका है कि यदि वे सरकार पर दबाव नहीं बनाएंगे तो उनकी स्थिति और बदतर होती जाएगी। पाकिस्तान अब हर तरफ से घिर चुका है, इसी कारण लोग अपनी सहनशक्ति खो चुके हैं और खुलकर सड़कों पर अपनी निराशा प्रकट कर रहे हैं।' गौरतलब है कि इन इलाकों में पाकिस्तानी सेना द्वारा आम लोगों पर बल प्रयोग और हिंसा की खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं।

अपनी समस्याओं पर ध्यान दे पाकिस्तान

विद्या भूषण सोनी का मानना है कि पाकिस्तान को दूसरे देशों के मामलों में दखल देने और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मध्यस्थ बनने की अपनी जिद छोड़कर सबसे पहले अपने ही नागरिकों की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। पूर्व राजनयिक के मुताबिक, यदि सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं नहीं बदलीं, तो इसके गंभीर और लंबे समय तक बने रहने वाले दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। यह विरोध जल्द शांत होने की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पाकिस्तान की सरकार शायद अपने ही लोगों की आवाजों को दबाने के लिए क्रूर बल का प्रयोग जारी रखेगी। उन्होंने कहा, 'जब तक पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में फंसा रहेगा और अपने नागरिकों की उपेक्षा करेगा, तब तक वह दमनकारी नीतियों का सहारा लेना बंद नहीं करेगा।'

JKAAC ने उठाए सुरक्षा बलों पर सवाल

इस बीच जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी, जिसे संक्षेप में JKAAC कहा जाता है, ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से वहां तैनात सुरक्षा बलों के कृत्यों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। संगठन ने कहा कि घायलों के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार और सादे कपड़ों में पुलिस के साथ मिलकर काम करने वाले नकाबपोश लोगों की उपस्थिति वहां की कानून-व्यवस्था की पोल खोलती है। JKAAC ने दावा किया है कि मीरपुर क्षेत्र से जो वीडियो फुटेज सामने आए हैं, उनमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि सुरक्षा बल किस प्रकार की कार्रवाई कर रहे हैं। संगठन का यह भी आरोप है कि सुरक्षाबलों ने आम लोगों की निजी संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया है, जो उनकी कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न है।

सीसीटीवी फुटेज और निष्पक्ष जांच की मांग

JKAAC ने यह भी दावा किया कि सबूतों को मिटाने के लिए सुरक्षा बलों ने निगरानी उपकरणों जैसे सीसीटीवी कैमरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। यह कार्रवाई पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल पैदा करती है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक मानवाधिकार संगठनों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विभिन्न देशों के राजनयिक मिशनों से अपील की है कि वे वायरल हो रहे वीडियो और तमाम सबूतों की गंभीरता से संज्ञान लें। JKAAC की मांग है कि पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर में घटित इन घटनाओं की एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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