भारत के हमले से तबाह जैश के ठिकाने का पाकिस्तान ने किया मेकओवर, विदेशी मार्बल से चमक उठा बहावलपुर मरकज विश्व 10 घंटे पहले 4
भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त हुए जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मरकज सुभानअल्लाह की तस्वीर बदल गई है। पाकिस्तान की मदद से आतंकी संगठन ने अपने इस मुख्य अड्डे को दोबारा तैयार कर लिया है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।

पाकिस्तान का दोहरा चेहरा और आतंक को संरक्षण

पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद को लेकर अक्सर बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। हालिया रिपोर्ट्स और सामने आई तस्वीरों से यह साफ हो गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा तबाह किए गए जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मरकज सुभानअल्लाह को दोबारा खड़ा कर दिया गया है। जिस इमारत को कभी भारतीय हमलों ने खंडहर में तब्दील कर दिया था, वह अब नए रूप में चमक रही है। इस पुनर्निर्माण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हमले के निशान मिटाने की तेजी

करीब 15 महीने पहले जब इस परिसर पर हमला हुआ था, तब वहां हर तरफ तबाही के निशान थे। मिसाइल के हमले से बनी इमारत की दरारें और ध्वस्त गुंबद इसकी गवाही दे रहे थे। हालांकि, अब जो विजुअल्स सामने आए हैं, उनमें हैरान करने वाली तब्दीलियां दिख रही हैं। मुख्य हॉल के भीतर जो गहरे गड्ढे हमले के दौरान बने थे, उन्हें भर दिया गया है और वहां अब नया फर्श बिछाया गया है। इतना ही नहीं, परिसर में विदेशी मार्बल का इस्तेमाल किया गया है और दीवारों पर ताजा पेंट और प्लास्टर किया गया है। यह देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो पाकिस्तान किसी आतंकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसके सौंदर्यीकरण और मेकओवर में जुटा है।

25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की भारी फंडिंग

खुफिया सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि इस पूरे पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट के पीछे पाकिस्तान के सरकारी तंत्र का हाथ है। जैश-ए-मोहम्मद को इस काम के लिए करीब 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। इनमें से चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ मुख्य हॉल के निर्माण पर ही 11 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जब संयुक्त राष्ट्र जैश-ए-मोहम्मद को एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है, तब पाकिस्तान द्वारा उसके मुख्यालय को दोबारा संवारने के लिए इतनी बड़ी धनराशि मुहैया कराना यह साबित करता है कि वहां का तंत्र आतंकियों को संरक्षण देने में पीछे नहीं है।

मदरसा और कमांडरों के ठिकानों का विस्तार

यह निर्माण कार्य केवल एक इमारत तक सीमित नहीं रहा है। मरकज परिसर के भीतर स्थित मदरसा अल-साबिर और उन हिस्सों में भी नए निर्माण किए गए हैं जहाँ जैश के खूंखार कमांडर रहा करते थे। ये वही हिस्से हैं जिन्हें जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। कमांडरों के रहने वाले ठिकानों को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ दोबारा तैयार किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की मदद से जैश अपना नेटवर्क फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

नेतृत्व में बदलाव और संगठन की नई रणनीति

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद की कमान और रणनीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जानकारी के अनुसार, जैश का सरगना मसूद अजहर गंभीर रूप से बीमार है, जिसके कारण अब संगठन की असली डोर उसके भाइयों और करीबी सहयोगियों के हाथों में है। तल्हा अल-सैफ और मोहिउद्दीन औरंगजेब, जिसे अम्मार अल्वी के नाम से भी जाना जाता है, इस परिसर के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, मसूद अजहर और उसका भाई रऊफ असगर पाकिस्तान के किसी गुप्त और सुरक्षित स्थान पर छिपे हुए हैं। इन विजुअल्स ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का केवल ढोंग करता है, जबकि असल में वह इन नेटवर्क को संजीवनी देने का काम कर रहा है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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