बलूचिस्तान से पाक सेना का नियंत्रण खत्म, BLA ने शुरू किया मुखबिरों का खात्मा विश्व एक दिन पहले 12
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी का दबदबा लगातार बढ़ रहा है, जहाँ संगठन ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने वालों के खिलाफ हंट एंड किल अभियान तेज कर दिया है।

बलूचिस्तान में ढह रही है पाकिस्तानी सेना की पकड़

बलूचिस्तान के मौजूदा हालात यह स्पष्ट कर रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का खौफ अब वहां के लोगों और विद्रोही संगठनों पर बेअसर साबित हो रहा है। पाकिस्तानी हुकूमत की तमाम साजिशें और सैन्य ताकत के बावजूद बलूचिस्तान का आजादी का संघर्ष और तेज होता जा रहा है। अब स्थिति यह बन गई है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने पाकिस्तानी सेना के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए अपने ऑपरेशंस को बदल दिया है। वे अब केवल सेना के ठिकानों पर हमला नहीं कर रहे, बल्कि उन स्थानीय लोगों को भी चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं जो पाकिस्तानी फौज के लिए मुखबिरी का काम करते हैं।

क्वेटा में BLA का बड़ा एक्शन

हाल ही में क्वेटा के सरयाब मिल इलाके में हुई एक हत्या ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने जिम्मेदारी लेते हुए बताया कि उन्होंने फारूक मोहम्मद हसनी नामक एक व्यक्ति को मौत के घाट उतारा है। संगठन का आरोप है कि हसनी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लिए एक सक्रिय मुखबिर के तौर पर काम कर रहा था। BLA की खुफिया इकाई काफी समय से उस पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही हसनी मंगुचर से क्वेटा पहुंचा, विद्रोहियों ने उसे अपने जाल में फंसाकर मार गिराया। BLA का साफ कहना है कि जो भी व्यक्ति पाकिस्तानी राज्य और सुरक्षा बलों का साथ देगा, उसे अंजाम भुगतना ही होगा।

हंट एंड किल अभियान की रणनीति

BLA ने अपनी इस कार्रवाई को ऑपरेशन गोबात और अपने नए हंट एंड किल अभियान का हिस्सा बताया है। संगठन के दावों के अनुसार, फारूक मोहम्मद हसनी न केवल बलूच अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों की पहचान करने में सेना की मदद करता था, बल्कि वह राज्य द्वारा किए जाने वाले जबरन लापता (एनफोर्सड डिसअपीयरेंस) के मामलों में भी एक मुख्य मददगार था। इस घटना के बाद से बलूचिस्तान में उन लोगों में भारी डर है जो छिपकर पाकिस्तानी एजेंसियों को सूचनाएं देते हैं। BLA का मानना है कि इन मुखबिरों के खात्मे के बिना बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य पैठ को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है।

दमन बनाम आजादी का संघर्ष

बलूचिस्तान में जारी इस लंबे विद्रोह के पीछे स्थानीय लोगों की दशकों पुरानी नाराजगी है। BLA और अन्य बलूच समूह लगातार पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे राजनीतिक दमन, फर्जी मुठभेड़ों और युवाओं को अगवा करने जैसी घटनाओं में लिप्त हैं। बलूचों ने खुद को आजाद घोषित कर दिया है और वे किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के कब्जे को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को उग्रवादी और अलगाववादी बताकर इन्हें कुचलने की कोशिश करती है। हालांकि, इन सरकारी दावों के विपरीत BLA की ताकत जमीन पर लगातार बढ़ रही है।

पाक फौज के हाथ-पैर काटने की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि BLA की रणनीति अब और अधिक सटीक और खुफिया जानकारी पर आधारित हो गई है। वे अब केवल बड़ी लड़ाइयों पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि पाकिस्तानी सेना के 'कान और आंख' माने जाने वाले मुखबिरों को चुन-चुनकर खत्म कर रहे हैं। क्वेटा की यह गोलीबारी सीधे तौर पर यह संदेश देती है कि संघर्ष का स्वरूप अब व्यक्तिगत हो गया है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने एक बार फिर दोहराया है कि उन्हें बलूचिस्तान की पूर्ण आजादी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। उन्होंने उन सभी लोगों को चेतावनी दी है जो पाकिस्तानी राज्य तंत्र के साथ मिलकर अपने ही लोगों के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं कि उनका हश्र भी वैसा ही होगा। बलूचिस्तान में पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था अब धीरे-धीरे अपनी विश्वसनीयता खोती जा रही है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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