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एक घंटा पहले
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पाकिस्तानी पत्रकार और विश्लेषक मोईद पीरजादा का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है। इस वीडियो में दावा किया गया है कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने वर्तमान आर्मी चीफ आसिम मुनीर को 'साइकोपैथ' और मानसिक रूप से अस्वस्थ करार दिया था। यह वीडियो एक्स (पूर्व ट्विटर) पर खूब साझा किया जा रहा है।
वायरल वीडियो में क्या कहा गया
मोईद पीरजादा ने अपने वीडियो में दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान दस पत्रकारों के साथ बैठक में मौजूद थे और उनसे बातचीत कर रहे थे। उसी दौरान इमरान खान ने बताया था कि जनरल बाजवा ने एक बार कहा था कि आसिम मुनीर को सेना प्रमुख नहीं बनने देना चाहिए।
पीरजादा के मुताबिक, इसके पीछे बाजवा का तर्क यह था कि मुनीर एक साइकोपैथ हैं, बेतुकी बातें करते हैं, मानसिक रूप से ठीक नहीं हैं और इस पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति नहीं हैं।
वीडियो में पीरजादा ने आगे कहा कि पाकिस्तान के मौजूदा हालात को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुनीर को लेकर जनरल बाजवा की बात सही थी। उनका कहना था कि अगर बाजवा ने अपने प्रधानमंत्री इमरान खान से इस तरह की पेशेवर बात की थी, तो यह काफी हद तक उचित मानी जा सकती है।
मौजूदा हालात के लिए मुनीर को जिम्मेदार बताया
पीरजादा ने बताया कि इमरान खान ने उन्हें इस बारे में अप्रैल 2022 में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इस समय जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए मुनीर खुद जिम्मेदार हैं।
पाकिस्तान में बिगड़ते हालात
पाकिस्तान में इन दिनों स्थिति काफी खराब नजर आ रही है। पाकिस्तान सरकार पीओके में विरोध प्रदर्शन कर रहे जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुटी है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि पुराने मामलों को दोबारा खोला जाएगा और प्रदर्शन से जुड़े नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
प्रदर्शनों पर सेना की सख्ती
प्रदर्शनों में सबसे आगे रहने वाली जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 9 जून को पूरे क्षेत्र में एक बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। इसके बाद से पाकिस्तानी सेना लगातार पीओके के लोगों का दमन कर रही है। कमेटी का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने पिछले छह दिनों में कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर कार्रवाई और तेज कर दी है।
पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने कहा है कि अक्टूबर 2025 में हुए हिंसक प्रदर्शनों से जुड़ी सभी 177 एफआईआर (FIR) दोबारा खोली जाएंगी। इन मामलों में कई गंभीर आरोप शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि JAAC पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर आंदोलन चला रही है। लेकिन इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला रही है।
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