मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सजेगा विपक्ष का मंच, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ होगा प्रतीकात्मक महाभियोग राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में एक अनोखा कदम उठाया है। 30 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष के घर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध एक प्रतीकात्मक जन महाभियोग आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी।

विपक्ष की अनोखी रणनीति और जन महाभियोग

विपक्षी गठबंधन इंडिया ने कथित तौर पर हो रही वोट चोरी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए एक बेहद अनोखा सियासी रास्ता चुना है। गठबंधन के नेताओं ने फैसला किया है कि 30 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सरकारी आवास पर एक प्रतीकात्मक जन महाभियोग चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है, जिसे लेकर विपक्ष काफी आक्रामक नजर आ रहा है।

मीरा कुमार करेंगी कार्यक्रम की अध्यक्षता

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विशेष कार्यक्रम की बागडोर लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार संभालेंगी। वे 30 अक्टूबर को आयोजित होने वाली इस मॉक पार्लियामेंट यानी प्रतीकात्मक संसद की अध्यक्षता करेंगी। इस आयोजन की रूपरेखा तय करने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं ने खरगे के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

खरगे का प्रस्ताव और राहुल गांधी का समापन

विपक्षी एकता के इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मुख्य भूमिका निभाएंगे। वे खुद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश करेंगे। वहीं, इस प्रस्ताव को अंतिम रूप से पारित किए जाने से पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपना समापन भाषण देंगे। यह पूरा आयोजन विपक्ष की एकजुटता दिखाने और लोकतंत्र बचाने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

आरोप और विपक्ष का स्टैंड

बेंगलुरु में पत्रकारों से चर्चा करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ किया कि विपक्ष का यह विरोध केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि वोट चोरी के मुद्दे पर उनका संघर्ष जारी रहेगा और इसमें सभी विपक्षी दल एक साथ हैं। खरगे के मुताबिक, 30 अक्टूबर के बाद 1 नवंबर को एक विशाल रैली का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश भर के लोग हिस्सा लेंगे। खरगे ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जब तक संघर्ष नहीं किया जाता, तब तक जनता जागरूक नहीं होती, इसलिए वे ये कदम उठा रहे हैं।

विपक्ष की एकजुटता और रणनीतिक चर्चा

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने इस कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विपक्ष चाहता है कि एसआईआर और वोट चोरी जैसे हर गंभीर मुद्दे पर देश में चर्चा हो। उन्होंने कहा कि जनता की पीड़ा और लोकतंत्र पर हो रहे कथित हमलों को संसद के बाहर इस मंच के माध्यम से उठाया जाएगा ताकि लोगों को विश्वास दिलाया जा सके कि विपक्ष एकजुट है। समाजवादी पार्टी के नेता हरेंद्र मलिक ने बताया कि इस जन महाभियोग में प्रत्येक दल की तरफ से केवल एक प्रतिनिधि ही अपनी बात रखेगा। यह संबंधित दल के नेता का व्यक्तिगत निर्णय होगा कि वे खुद बोलेंगे या अपनी जगह किसी और को नामित करेंगे।

क्यों आयोजित हो रहा है यह विरोध?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी दी है कि कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति न मिल पाने के कारण इस कार्यक्रम को खरगे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। यह कार्यक्रम 30 अक्टूबर को अपराह्न 3:30 बजे शुरू होगा। विपक्षी दलों की मुख्य नाराजगी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर है। इन्ही मुद्दों के चलते विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश, के. सी. वेणुगोपाल, टीएमसी के डेरेक ओब्रायन, सपा के हरेंद्र मलिक, झामुमो की महुआ माजी और माकपा के जॉन ब्रिटास समेत तमाम प्रमुख नेताओं ने इस कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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