खेल
2 महीने पहले
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विचारों
खेल जगत में शोक की लहर
एक तरफ जहां पूरी दुनिया इस समय फीफा वर्ल्ड कप 2026 के रोमांच और खेल के उत्सव में डूबी हुई है, वहीं फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। फिलिस्तीन के जाने-माने फुटबॉलर और खान यूनिस सर्विसेज क्लब के भरोसेमंद गोलकीपर सलीम खादर अल-अश्कर की मौत हो गई है। 32 वर्षीय इस खिलाड़ी को इजरायली सेना की गोलीबारी का शिकार होना पड़ा है। इस खबर ने खेल जगत में सन्नाटा फैला दिया है और हर किसी की आंखें नम हैं।
घटना की आधिकारिक पुष्टि
इस हृदयविदारक घटना की आधिकारिक पुष्टि फिलिस्तीनी फुटबॉल संघ ने की है। संघ द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह त्रासदी खान यूनिस के उत्तर-पूर्व में स्थित अल-करारा कस्बे में घटी। सलीम खादर अल-अश्कर उस समय वहीं मौजूद थे, जब इजरायली डिफेंस फोर्स की गोलीबारी में उनकी जान चली गई। फिलिस्तीनी फुटबॉल संघ ने इस निधन को खेल जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति बताया है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। मैदान पर अपनी चपलता और गोलपोस्ट के सामने एक चट्टान की तरह डटकर खड़े रहने वाले सलीम की कमी उनके साथी खिलाड़ियों को हमेशा खलेगी।
पिता बनने का सपना रह गया अधूरा
सलीम अल-अश्कर की जिंदगी की कहानी का सबसे दुखद और भावुक पहलू उनका व्यक्तिगत जीवन है। सलीम की शादी हुए अभी महज 5 महीने ही हुए थे। उनका वैवाहिक जीवन अभी अपनी शुरुआती खुशियों को तलाश ही रहा था कि इस त्रासदी ने सब कुछ बिखेर दिया। उनकी पत्नी फिलहाल गर्भवती हैं और जल्द ही अपने पहले बच्चे को जन्म देने वाली हैं। यह कितना दुखद है कि सलीम अपने उस पहले बच्चे का चेहरा देखने और उसे अपनी बाहों में लेने के सुख से वंचित रह गए। एक ऐसा मासूम बच्चा जो अभी दुनिया में आया भी नहीं है, उसने अपने पिता को खो दिया है।
परिवार का टूटा सहारा
सलीम अल-अश्कर सिर्फ एक फुटबॉलर या अपनी पत्नी के पति ही नहीं थे, बल्कि वे अपने माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी और अपनी सात बहनों के इकलौते भाई थे। घर में सात बहनों के बीच अकेले भाई का होना उस परिवार के लिए एक गौरव और सुरक्षा का प्रतीक था। सलीम के चले जाने से उनके परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है जिससे उबरना असंभव है। सात बहनों का इकलौता भाई अब कभी घर वापस नहीं लौटेगा, यह सोचकर ही हर किसी का हृदय कांप उठता है।
युद्ध की विभीषिका और खेल जगत
अक्टूबर 2023 से गाजा में जो संघर्ष जारी है, उसने न केवल आम नागरिकों बल्कि खिलाड़ियों के सपनों को भी बुरी तरह कुचल दिया है। आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 567 फुटबॉलरों सहित कुल 1,009 फिलिस्तीनी खिलाड़ियों की जान जा चुकी है। सलीम अल-अश्कर की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि युद्ध की आग किस तरह मासूमों की जिंदगी और उनके सुनहरे भविष्य को राख कर देती है। सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई है। पीएफए के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और खेल प्रेमियों के पेजों पर हजारों लोग अपनी संवेदनाएं साझा कर रहे हैं। कमेंट बॉक्स में उनके प्रति श्रद्धांजलि और परिवार के लिए प्रार्थनाओं का तांता लगा हुआ है। साथी खिलाड़ी और कोच अपने इस चहेते गोलकीपर को नम आंखों से याद कर रहे हैं। आज फुटबॉल का मैदान अपने एक सच्चे रक्षक के लिए शोक मना रहा है, जिसकी दास्तान सिर्फ एक खिलाड़ी की मौत नहीं, बल्कि एक उजड़ चुके परिवार और एक पिता के अधूरे सपनों की दास्तां है।
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