खेल
2 महीने पहले
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एशियाई खेलों में प्रदर्शन को लेकर सरकार का सख्त रुख
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने आगामी एशियाई खेलों को लेकर अपनी रणनीति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एशियाई खेल कोई मौज-मस्ती या एक्सपोजर ट्रिप नहीं है। इस बार सरकार ने खिलाड़ियों के चयन में बेहद सख्ती बरती है, ताकि केवल वही एथलीट जापान जा सकें जो वास्तव में पदक जीतने का दम रखते हैं। जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इन खेलों के लिए भारत की ओर से 600 से कम एथलीटों का दल भेजा जाएगा।
केवल मेडल जीतने वालों को मौका
खेल मंत्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए जोर देकर कहा कि किसी भी खिलाड़ी को केवल अनुभव हासिल करने या घूमने-फिरने के उद्देश्य से टीम में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने साफ किया कि एशियाई खेल देश का मान बढ़ाने का एक बड़ा मंच है, न कि ऐसे खिलाड़ियों के लिए जगह जो पहले ही दौर में हारकर बाहर हो जाएं। उनका मानना है कि जो खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन करने में सक्षम हैं, केवल उन्हीं को भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है।
चयन प्रक्रिया में बरती गई पूरी पारदर्शिता
मांडविया ने बताया कि इस बार की चयन प्रक्रिया में पूर्ण निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि चयन को लेकर कहीं कोई बड़ा विवाद नहीं है, और यदि इक्का-दुक्का मामले सामने आए भी हैं, तो उन्हें भी जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। खेल मंत्री के अनुसार, अब किसी को भी सिर्फ नौकरी पाने के लालच में या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में एशियाई खेलों या राष्ट्रमंडल खेलों की टीम में शामिल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, खेल से जुड़े कर्मचारियों के परिजनों को सपोर्ट स्टाफ के तौर पर भेजने की प्रथा पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
कैसे सुनिश्चित हुआ निष्पक्ष चयन?
चयन प्रक्रिया की कार्यप्रणाली साझा करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि खेल महासंघों द्वारा प्रस्तावित नामों को भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा कड़ी समीक्षा के बाद ही खेल मंत्रालय की अंतिम मंजूरी मिलती है। खेल मंत्रालय ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष उपाय किए हैं:
- खिलाड़ियों के चयन ट्रायल की प्रक्रिया को कैमरे के सामने पूरा किया गया है।
- हर ट्रायल के दौरान एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है।
- इन ट्रायल के आधार पर तैयार की गई अंतिम सूची ही आगे भेजी जाती है।
इस नई कार्यशैली से सरकार का उद्देश्य भारतीय खेल जगत में व्याप्त खामियों को दूर करना और केवल योग्य एथलीटों को ही वैश्विक मंच प्रदान करना है, ताकि भविष्य में भारत का पदक तालिका में स्थान बेहतर हो सके।
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