एक्सप्लेनर: 'ऑपरेशन टाइगर' की आहट, क्या उद्धव की शिवसेना में फिर पड़ेगी फूट? महाराष्ट्र 3 दिन पहले 10
तृणमूल कांग्रेस में बगावत की चर्चा के बीच अब महाराष्ट्र की शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलें तेज हैं। 'ऑपरेशन टाइगर' के नाम से उठी इन खबरों ने उद्धव ठाकरे की चिंता बढ़ा दी है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद वहां की सियासत में मजबूती से टिकी तृणमूल कांग्रेस अचानक आई सियासी आंधी में हिलती दिखी। तृणमूल के कई बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और लगभग गुमनाम सी पार्टी नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपनी टीएमसी का विलय करने का ऐलान कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम पर सबकी निगाहें टिकी रहीं। इसी बीच अब बगावत की एक और चर्चा सामने आई है और वह है महाराष्ट्र की शिवसेना को लेकर, जो पहले ही दो हिस्सों में टूट चुकी है। अब इसके एक धड़े यानी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में फूट की अटकलें जोर पकड़ रही हैं।

उद्धव की शिवसेना में हलचल क्यों बढ़ी?

चर्चा है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना के कुछ सांसद पार्टी से अलग होकर खुद को असली शिवसेना यानी शिंदे गुट में शामिल कर सकते हैं। इसी खबर ने उद्धव ठाकरे की बेचैनी बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया है, जिसने उद्धव खेमे में यह डर पैदा कर दिया है कि उनके कुछ सांसद महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना का रुख कर सकते हैं। खबर इतनी तूल पकड़ गई कि उद्धव ठाकरे ने पार्टी में फूट की अफवाहों को थामने के लिए मातोश्री में अपने सभी नौ लोकसभा सांसदों की बैठक बुला ली। चूंकि शिवसेना पहले ही एक बार बुरी तरह बंट चुकी है, इसलिए नई बगावत की चर्चाओं ने एक बार फिर चिंता गहरी कर दी है।

'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा क्यों?

जब से उद्धव ठाकरे की शिवसेना में बगावत की अटकलें उड़ीं, तभी से महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' शब्द तेजी से इस्तेमाल होने लगा है। कहा जा रहा है कि इस कथित ऑपरेशन का मकसद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के जरिए उद्धव गुट के नेताओं को अपनी ओर खींचना है। बिना आग के धुआं नहीं उठता, और कहा जा रहा है कि उद्धव की शिवसेना के कई सांसद शिंदे गुट के नेताओं के लगातार संपर्क में हैं। यह भी दावा है कि दिल्ली में इस पर बातचीत हुई है।

ऑपरेशन टाइगर बनाम ऑपरेशन प्रोग्रेस

इन अटकलों को तब और बल मिला जब केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप जाधव ने दावा किया कि उद्धव गुट की शिवसेना के सभी सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। साथ ही ठाकरे गुट के कुछ सांसदों की गुप्त मुलाकातों की खबरें भी सामने आईं। हालांकि शिंदे की शिवसेना ने विरोधी दलों को तोड़ने की किसी भी कोशिश से सार्वजनिक रूप से इनकार किया और कहा कि उद्धव के लिए बगावत कोई नई बात नहीं है। शिंदे गुट ने 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा को राजनीतिक अटकलबाजी बताते हुए कहा कि यहां 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं, बल्कि 'ऑपरेशन प्रोग्रेस' चल रहा है।

शिवसेना में दो फाड़ क्यों हुई थी?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद साल 2022 में शिंदे ने राज्य की राजनीति की सबसे बड़ी बगावत की थी। उन्होंने शिवसेना के ज्यादातर विधायकों को अपने साथ लेकर उद्धव ठाकरे की सरकार गिरा दी। इस बगावत के चलते शिवसेना दो विरोधी गुटों में बंट गई और पार्टी के नाम तथा चुनाव चिह्न को लेकर लंबी कानूनी एवं राजनीतिक लड़ाई चली। बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना और उसे पार्टी का पारंपरिक 'धनुष-बाण' वाला चुनाव चिह्न दे दिया। इसके बाद उद्धव के गुट को 'शिवसेना' उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) के नाम से काम करना पड़ा।

उद्धव की मुश्किल क्यों बढ़ी?

बगावत की अफवाहों के बीच उद्धव ठाकरे ने 'मातोश्री' में अपने सांसदों की बैठक बुलाई, जिसमें सिर्फ चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि चार अन्य वर्चुअली जुड़े और एक सांसद ने बाद में ठाकरे से फोन पर बात की। कई सांसदों के मौके पर मौजूद न रहने से यह कयास तेज हो गए कि पार्टी में बगावत पनप रही है। अटकलें तब और बढ़ गईं जब बैठक में शामिल न होने वाले शिवसेना (UBT) सांसद संजय देशमुख को बाद में नई दिल्ली में शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव से मिलते देखा गया।

यूबीटी नेताओं का क्या कहना है?

यूबीटी नेताओं का कहना है कि शिवसेना के सभी नौ सांसद एकजुट हैं। उनका तर्क है कि अगर उनके पास ईडी होती तो उनकी भी धाक होती और शिवसेना को लेकर 'ऑपरेशन टाइगर' की खबरें महज अफवाह हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक शरद पवार के बाद अगर सबसे ज्यादा लोकप्रतिनिधियों से मिलने वाला कोई नेता है तो वह उद्धव ठाकरे हैं और मातोश्री का दरवाजा सबके लिए खुला रहता है।

आदमी की खरीद-फरोख्त को ही फोड़ाफोड़ी कहते हैं, जो पिछले 10 साल से देश में चल रहा है। अगर कोई सांसद किसी मंत्री से मिल रहा है तो उसमें बुरा क्या है, अगर कोई काम देशहित से जुड़ा होगा तो मैं भी प्रधानमंत्री से मिलूंगा।

एक नेता ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने बैठक में सबसे बातचीत की और उन्होंने यह बयान नहीं दिया कि अगर किसी को जाना है तो जाए, क्योंकि अब पार्टी तोड़ने वालों को लोग जूते से मारेंगे। उनके अनुसार बैठक में सांसदों ने उद्धव ठाकरे के सामने मां भवानी की कसम खाई और कहा कि वे उद्धव साहेब के साथ हैं। नेता को उम्मीद है कि सांसद इस कसम का पालन करेंगे।

क्या सच में सांसद पार्टी छोड़ेंगे?

इसका जवाब यह है कि अगर सांसदों का कोई गुट पाला बदलना चाहता है, तो उसे दलबदल विरोधी कानूनों का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम छह से सात सांसद कथित तौर पर शिंदे गुट के संपर्क में हैं, हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और उद्धव की शिवसेना ने इनका खंडन किया है। उद्धव ठाकरे के लिए यह एक परीक्षा है कि क्या वह 2022 की उस बगावत को दोहराने से रोक पाएंगे, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति बदल दी थी। वहीं एकनाथ शिंदे के लिए यह शिवसेना के राजनीतिक दायरे पर अपनी पकड़ और मजबूत करने का अवसर है।

शिंदे ने सवालों का जवाब नहीं दिया

'ऑपरेशन टाइगर' चाहे सचमुच नेताओं को तोड़ने की कोशिश हो या सिर्फ राजनीतिक अफवाह, शिवसेना (UBT) का सार्वजनिक रूप से अपने सांसदों की गिनती कर उन्हें दिखाना यह साफ जाहिर करता है कि 2022 की फूट का साया अब भी उद्धव ठाकरे की पार्टी का पीछा कर रहा है। इसी बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे 'मंत्रालय' पहुंचे। उन्होंने शिवसेना UBT के पांच विधायकों के शिंदे गुट में शामिल होने से पहले एक अलग गुट बनाने की अटकलों पर पूछे गए किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

संजय निरुपम ने क्या कहा?

'ऑपरेशन टाइगर' पर शिवसेना नेता संजय निरुपम कहते हैं:

उबाठा (UBT) पार्टी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उनके MLA और MP को अब उबाठा की लीडरशिप पर भरोसा नहीं रहा। 2029 तक यह पार्टी खत्म हो जाएगी। लोग रोज उबाठा छोड़ रहे हैं। जहां तक उनके MP की बात है, तो हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। यह उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है... यह पार्टी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी और लोग इसे छोड़ देंगे।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!