राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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विचारों
मरम्मत के नाम पर खौफ को छिपाने की नाकाम कोशिश
ऑपरेशन सिंदूर की गूंज आज भी दक्षिण एशिया की फिजाओं में महसूस की जा सकती है। भारतीय वायुसेना के पराक्रम ने नफरत के जिस बड़े केंद्र को जमींदोज कर दिया था, खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान ने उसे फिर से खड़ा कर लिया है। सीमा पार से सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, बहावलपुर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद का मुख्य मुख्यालय अब बनकर तैयार हो चुका है। इस जगह को सुभानअल्लाह मरकज कहा जाता है, जहाँ से फिदायीन तैयार करने का नापाक काम किया जाता था। इस पूरे ठिकाने पर भारतीय वायुसेना ने सात मई, 2025 की रात को जबरदस्त हमला बोला था। उस रात राफेल विमानों से दागी गई स्काल्प मिसाइलों ने मरकज के हर कोने को छलनी कर दिया था, जिसकी तस्वीरें आठ मई को पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय बनी थीं।
यह सच है कि मौलाना मसूद अजहर के समर्थक और पाकिस्तान के हुक्मरानों ने मिल-जुलकर उस इमारत की मरम्मत कर ली है। वहां का मलबा हटाकर फिर से चकाचक ढांचा खड़ा कर दिया गया है। इसमें मुनीर के तंत्र ने पूरी मदद की है। लेकिन कंक्रीट की ईंटों से बनी यह नई दीवारें इस कड़वे सच को नहीं बदल सकतीं कि उन्हें भारत के उस घातक प्रहार का अंजाम हमेशा याद रहेगा।
ऑपरेशन सिंदूर का वो खौफनाक मंजर
इस हमले में बहावलपुर के आतंकी मॉड्यूल से जुड़े लगभग 100 आतंकियों को जहन्नुम के हवाले कर दिया गया था। इतना ही नहीं, खुद मसूद अजहर के 10 से ज्यादा करीबी रिश्तेदार भी इस कार्रवाई में मारे गए थे। पाकिस्तान के लिए यह हमला सिर्फ एक इमारत का विनाश नहीं था, बल्कि यह एक बड़ा रणनीतिक झटका था। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को हमेशा के लिए एक नई दिशा दे दी है। इस हमले के बाद दक्षिण एशिया का भू-रणनीतिक संतुलन पूरी तरह से बदल गया है। आज पाकिस्तान चाहे तो तबाही के उन निशानों को मिटाने की कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन इतिहास की जमीनी सच्चाई को बदलना नामुमकिन है।
भारत की नई आक्रामकता और पाकिस्तान की बेबसी
भारतीय वायुसेना के मिराज और राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर जो सटीक हवाई स्ट्राइक की थी, उसने आतंक के पूरे बुनियादी ढांचे को हिलाकर रख दिया था। स्काल्प मिसाइलों ने बहावलपुर के जिस गढ़ में छेद किए थे, वे सिर्फ कंक्रीट की छतों पर नहीं थे, बल्कि वे पाकिस्तान के उस झूठे भरोसे पर एक जोरदार प्रहार थे, जिसे वह दशकों से छद्म युद्ध की आड़ में सुरक्षित मानकर पाल रहा था।
पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान को भी यह अच्छी तरह मालूम है कि भारतीय मिसाइलों की सटीकता ने उनकी रक्षा प्रणाली की पोल खोल दी है। उनकी पूरी हवाई सुरक्षा प्रणाली भारतीय विमानों की गर्जना के सामने कितनी खोखली है, यह दुनिया के सामने साबित हो चुका है। आज जैश-ए-मोहम्मद भले ही उस जगह पर नया ढांचा खड़ा कर ले, लेकिन वे भारत के उस खौफ को कभी नहीं मिटा पाएंगे जो सात मई की रात को उनके दिलों में घर कर गया था।
रणनीति में बदलाव, अब जीरो टोलरेंस का दौर
पहलगाम की घटना के बाद भारत ने अपनी रणनीतिक प्रतिक्रिया का दायरा काफी विस्तृत कर लिया है। एक समय पाकिस्तान को लगता था कि उसकी परमाणु क्षमता के कारण भारत कोई भी बड़ी कार्रवाई करने से बचेगा। ऑपरेशन सिंदूर ने उस धारणा को एक झटके में चकनाचूर कर दिया है। अब भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। अब जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर बिल्कुल सटीक और निर्णायक हमले किए जाएंगे। भारत अब स्टेट और नॉन-स्टेट एक्टर्स के बीच का फर्क खत्म कर चुका है। पाकिस्तान के लिए यह स्पष्ट चेतावनी है कि अगर फिर से ऐसी कोई हिमाकत की गई, तो उसका अंजाम इससे भी कहीं ज्यादा घातक होगा। बहावलपुर का यह नया ढांचा बहादुरी का नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस बेबसी और डर का प्रतीक है, जो भविष्य के किसी भी संभावित हमले की आहट से कांप उठता है। ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।
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