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3 घंटे पहले
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विचारों
ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय लिखा जा रहा है। महाप्रभु श्री जगन्नाथ के रहस्यमयी और अमूल्य खजाने यानी रत्न भंडार में रखे सोने, चांदी, हीरों और अन्य कीमती आभूषणों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। मंदिर प्रशासन की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रत्न भंडार में रखे भगवान के सभी बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं पूरी तरह से सुरक्षित पाई गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक की गई जांच और गिनती में इन सभी सामग्रियों का मिलान वर्ष 1978 में तैयार की गई ऐतिहासिक सूची से पूरी तरह से हो रहा है।
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित कड़े नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP के तहत यह पूरी गणना और मिलान प्रक्रिया की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में अत्यंत गोपनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता और सटीकता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि महाप्रभु के इस अलौकिक खजाने का एक-एक विवरण पूरी दुनिया के सामने पूरी विश्वसनीयता के साथ दर्ज किया जा सके।
48 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई आभूषणों की गणना
श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने इस ऐतिहासिक कार्य के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भगवान के आभूषणों में जड़े हुए अत्यंत कीमती रत्नों की बहुत ही बारीकी और वैज्ञानिक तरीके से पहचान और जांच की जा रही है। अरविंद पाढ़ी के अनुसार, चूंकि यह कार्य सीधे तौर पर महाप्रभु के अमूल्य खजाने से जुड़ा है, इसलिए मंदिर प्रशासन किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में नहीं है। इस संपूर्ण प्रक्रिया को अत्यंत सटीक और त्रुटिहीन तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। यही कारण है कि फिलहाल प्रशासनिक तौर पर यह निश्चित समय-सीमा बताना कठिन है कि आभूषणों की यह विशाल गणना और मिलान का कार्य पूरी तरह कब तक संपन्न हो पाएगा।
मंदिर के रत्न भंडार की विस्तृत सूची तैयार करने और पुरानी सूची से मिलान करने की यह व्यापक प्रक्रिया मार्च 2026 में शुरू की गई थी। इस कार्य का महत्व इस बात से भी बढ़ जाता है कि यह प्रक्रिया लगभग 48 वर्षों के एक लंबे अंतराल के बाद दोबारा शुरू की गई है। इस गणना अभियान के पहले चरण का कार्य 25 मार्च से शुरू होकर 23 मई के बीच सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। इसके बाद, रथयात्रा के पावन अवसर पर भगवान के विशेष श्रृंगार में उपयोग किए जाने वाले रत्न और आभूषणों की गिनती का दूसरा चरण 19 जुलाई से प्रारंभ किया गया था।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग
गणना के विवरण को साझा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को महाप्रभु की सुबह की धूप नीति की रस्म पूरी होने के ठीक बाद, सुबह 11:30 बजे से शाम 6:45 बजे तक आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं का मिलान कार्य अत्यंत सतर्कता के साथ किया गया। इस प्रकार सोमवार को यह प्रक्रिया लगातार करीब 7 घंटे 25 मिनट तक चलती रही। मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने स्पष्ट किया है कि यह महत्वपूर्ण कार्य मंगलवार को भी लगातार जारी रहेगा।
रत्न भंडार जैसे अत्यधिक संवेदनशील और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर चल रही इस प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता के इतने कड़े प्रबंध किए गए हैं कि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं। मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि पूरी की पूरी प्रक्रिया CCTV कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में हो रही है। रत्न भंडार के भीतर केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई है जो इसके लिए पूरी तरह अधिकृत हैं। इसके अतिरिक्त, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। रत्न भंडार में रखे प्रत्येक आभूषण और कीमती सामान की वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग करते हुए 3D मैपिंग और कैटलॉगिंग भी की जा रही है ताकि भविष्य के लिए एक डिजिटल और अचूक रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
कीमती रत्नों के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों की विशेष टीम
इस बार की गणना केवल सामान्य गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि आभूषणों में जड़े हुए कीमती पत्थरों और रत्नों की शुद्धता और उनकी पहचान पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके लिए देश के प्रमाणित जेमोलॉजिस्ट यानी रत्न विशेषज्ञों की एक विशेष टीम की सेवाएं ली जा रही हैं। अधिकारियों ने खुलासा किया कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के आभूषणों में अत्यंत दुर्लभ हीरा, नीलम, मोती और माणिक्य जैसे बहुमूल्य रत्न जड़े हुए हैं।
इन प्राचीन और अद्वितीय रत्नों की सही पहचान करना और उनका वास्तविक मूल्यांकन करना एक बेहद पेचीदा और समय लेने वाला काम है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल एक सेट आभूषण के मिलान और परीक्षण में औसतन 30 मिनट का समय लग रहा है। यही मुख्य कारण है कि पूरी प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। इतिहास की बात करें तो वर्ष 1978 में जब पिछली बार रत्न भंडार की इन्वेंट्री तैयार की गई थी, तब तकनीकी संसाधनों और अत्याधुनिक विशेषज्ञता की कमी के कारण कई बहुमूल्य रत्नों की गहनता से जांच नहीं हो पाई थी। लेकिन इस बार आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और रत्न विशेषज्ञों की सहायता से एक-एक रत्न की प्रामाणिकता जांची जा रही है।
लकड़ी के बक्सों में सुरक्षित रखी गई हैं देव वस्तुएं
इस ऐतिहासिक गणना के दौरान एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। सदियों से श्रद्धालुओं और भक्तों द्वारा समय-समय पर महाप्रभु को अर्पित किए गए आभूषणों और उपहारों की एक पृथक यानी अलग सूची तैयार की जा रही है। इसके साथ ही, अब तक गिने जा चुके स्वर्ण आभूषणों और अन्य मूल्यवान सामग्रियों को सुरक्षित तरीके से सूचीबद्ध कर उन्हें भंडार के सेवायतों के सुपुर्द कर दिया गया है।
अधिकारियों ने यह भी साझा किया कि रत्न भंडार के भीतरी हिस्से में कुछ प्राचीन और मूल्यवान वस्तुएं विशाल लकड़ी के बक्सों में बंद रखी हुई हैं। इन सभी वस्तुओं का प्रारंभिक माप लिया जा चुका है और आने वाले दिनों में इनके गहन परीक्षण और दस्तावेजीकरण की विस्तृत प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
तीन प्रतियों में तैयार की जाएगी नई आधिकारिक सूची
सभी आभूषणों और कीमती वस्तुओं के वजन, माप और मूल्यांकन का काम पूर्ण होने के बाद उनकी एक अंतिम आधिकारिक सूची तैयार की जाएगी। इस प्रामाणिक सूची के कुल तीन सेट यानी तीन कॉपियां बनाई जाएंगी। इन तीनों सेटों को अत्यंत सुरक्षित तरीके से भीतरी रत्न भंडार में ही संरक्षित रखा जाएगा। इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य रत्न भंडार में मौजूद एक-एक वस्तु का डिजिटल और भौतिक रूप से व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना और पुरानी सूची के साथ उसका शत-प्रतिशत मिलान सुनिश्चित करना है।
श्रीमंदिर प्रशासन ने देश और दुनिया के तमाम जगन्नाथ भक्तों को आश्वस्त किया है कि वर्ष 1978 की सूची के अनुसार सभी आभूषण और कीमती सामान पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के लिए इसमें माननीय न्यायमूर्ति, छत्तीसानियोग के नायक, स्थानीय जिलाधिकारी और अन्य उच्च स्तरीय अधिकृत सदस्य भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं।
क्या सार्वजनिक की जाएगी रत्न भंडार की सूची?
इस संवेदनशील विषय पर बोलते हुए मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने कहा कि हमारा मुख्य ध्यान किसी भी तरह की जल्दबाजी के स्थान पर काम की शुद्धता, सटीकता और पारदर्शिता पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रत्न भंडार की पूरी इन्वेंट्री और मिलान की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट को सबसे पहले श्रीजगन्नाथ मंदिर की प्रबंध समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्रबंध समिति की विस्तृत समीक्षा और उसकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह मामला ओडिशा सरकार के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार ही अंतिम रूप से यह निर्णय लेगी कि रत्न भंडार के भीतर मौजूद आभूषणों और अमूल्य सामग्रियों की इस सूची को सार्वजनिक किया जाए या नहीं।
गणना का पूरा कार्यक्रम और पुराना इतिहास
यह महा-अभियान सोमवार को प्रारंभ हुआ था और मंगलवार को भी निरंतर जारी है। इस जांच और मूल्यांकन दल में भारतीय रिजर्व बैंक के अनुभवी वित्तीय विशेषज्ञों, देश के शीर्ष रत्न विशेषज्ञों, जौहरियों और पेशेवर फोटोग्राफरों की पूरी टीम जुटी हुई है। सुरक्षा के लिहाज से वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3D मैपिंग के जरिए पल-पल का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित किया जा रहा है।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, सोमवार को 10वीं बार अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम ने रत्न भंडार के भीतरी कक्ष में प्रवेश कर काम शुरू किया था। इससे पहले, वर्ष 1978 में जब आखिरी बार इस खजाने की गिनती और मूल्यांकन किया गया था, तो उस समय इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 72 दिनों का लंबा समय लगा था। अब, लगभग 48 वर्षों के बाद 24 मार्च 2026 से इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया की दोबारा शुरुआत की गई है। इसके पश्चात, 11 मई को इस काम को पुनः गति दी गई और करीब 9 दिनों तक लगातार काम चलने के बाद 30 मई को यह चरण संपन्न हुआ था।
वर्तमान में स्वीकृत SOP के प्रावधानों के अनुसार, रत्न भंडार की इन्वेंट्री का कार्य अत्यंत सुनियोजित ढंग से विभिन्न चरणों में विभाजित करके किया जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुई रथयात्रा के दौरान इस प्रक्रिया के तहत 2 घंटे 27 मिनट तक आभूषणों की गणना और उनके वजन का कार्य किया गया था। इस विशिष्ट चरण के दौरान भगवान के श्रृंगार में प्रयुक्त होने वाले 9 दुर्लभ आभूषणों की गिनती कर उनके पुराने रिकॉर्ड से मिलान की प्रक्रिया को पूरा किया गया। हालांकि, कुछ आभूषणों को उस समय इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सका था, क्योंकि उस विशेष अवधि में वे आभूषण स्वयं महाप्रभु के मुख्य श्रृंगार का हिस्सा थे।
अब आगे क्या होगा?
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की भावी योजनाओं के अनुसार, भीतरी रत्न भंडार में रखी गई सभी कीमती वस्तुओं की भौतिक गणना और उनका संपूर्ण रिकॉर्ड तैयार करने का काम पूरा होने के बाद, इन आभूषणों को सुरक्षित रखने के लिए लकड़ी के तीन बड़े विशेष संदूक तैयार किए जा रहे हैं। सोमवार को मंदिर प्रशासन द्वारा भीतरी रत्न भंडार में पहले से मौजूद पुराने लकड़ी के बक्सों का सटीक माप लिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भविष्य में आभूषणों को रखने के लिए जो नए संदूक बनाए जाएं, वे बिल्कुल सही आकार और सुरक्षा मानकों के अनुकूल हों।
इसके साथ ही, भीतरी रत्न भंडार में रखी गई कुछ प्राचीन और कीमती वस्तुएं आकार में अत्यधिक विशाल हैं, जिसके कारण भीतरी कक्ष के संकीर्ण स्थान पर उनकी भौतिक गणना, वजन और मूल्यांकन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। मंदिर प्रशासन ने निर्णय लिया है कि ऐसी विशालकाय वस्तुओं को गणना के लिए सुरक्षित रूप से 'खाता सेजा घर' लाया जाएगा। वहां पर शांत और सुरक्षित वातावरण में उनका सटीक वजन किया जाएगा, उनकी उच्च गुणवत्ता वाली फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी होगी और उनकी 3D मैपिंग की जाएगी ताकि उनका एक अचूक रिकॉर्ड तैयार हो सके। दस्तावेजीकरण की यह पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, इन सभी मूल्यवान देव-सामग्रियों को नए निर्मित संदूकों में अत्यंत सावधानी से बंद किया जाएगा और अंततः उन्हें वापस भीतरी रत्न भंडार के सुरक्षित कक्षों में पुनर्स्थापित कर दिया जाएगा।
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