ओडिशा में शर्मनाक घटना: अंतरजातीय विवाह के कारण सामाजिक बहिष्कार, पिता के शव को साइकिल पर ले जाने को मजबूर हुआ बेटा भारत एक महीने पहले 69
ओडिशा के बरगढ़ जिले में एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां एक परिवार को सामाजिक बहिष्कार के चलते अपने पिता का शव साइकिल पर श्मशान ले जाना पड़ा। बेटों के अंतरजातीय विवाह के कारण ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार में मदद करने से इनकार कर दिया था।

मानवता को शर्मसार करती घटना

ओडिशा के बरगढ़ जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना प्रकाश में आई है, जिसने समाज की संकीर्ण मानसिकता और क्रूरता को सबके सामने ला दिया है। पाईकमल ब्लॉक के कंटापड़ा गांव में एक बेटे को अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए शव को साइकिल पर लादकर ले जाना पड़ा। आरोप है कि गांव के लोगों ने परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर रखा था, जिसके चलते अंतिम विदाई के समय भी कोई मददगार आगे नहीं आया।

शादी बनी बहिष्कार का कारण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग पिता काफी समय से अस्वस्थ थे और निधन के बाद परिवार के सामने अंतिम संस्कार की चुनौती खड़ी हो गई। विवाद की जड़ बुजुर्ग के बेटों द्वारा किया गया अंतरजातीय विवाह बताया जा रहा है। इसी विवाह के कारण लंबे समय से ग्रामीणों ने इस परिवार से किनारा कर रखा था। जब पिता का देहांत हुआ, तो बेटों ने ग्रामीणों से सहयोग की गुहार लगाई, लेकिन सामाजिक दकियानूसी सोच के आगे मानवता हार गई और किसी ने भी शव को कंधा देने की जहमत नहीं उठाई।

मजबूरी में उठाना पड़ा यह कदम

परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शव वाहन का इंतजाम करने की भी पूरी कोशिश की। हालांकि, आर्थिक तंगी और गांव के भौगोलिक रूप से दुर्गम इलाके में होने के कारण उन्हें समय पर कोई एम्बुलेंस या शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। ऐसी विषम परिस्थितियों में हार मानकर, अंततः एक बेटे ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को रस्सी की सहायता से साइकिल पर बांधा और पैदल ही श्मशान घाट की ओर चल पड़ा।

सोशल मीडिया पर भड़के लोग

यह मंजर देखकर वहां मौजूद कुछ लोग भावुक हो गए, जबकि इस पूरी घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गए। इंटरनेट पर लोग इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं और समाज में व्याप्त भेदभाव पर तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं, विशेषकर शव वाहनों की कमी और समाज में जड़ जमाए बैठी रूढ़िवादी कुरीतियों की कलाई खोलती है। अब प्रशासन और समाज के जागरूक वर्ग से इस पर सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है ताकि किसी और को ऐसी अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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