चीन के दौरे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सीमा विवाद को लेकर वांग यी के साथ करेंगे मंथन भारत 10 घंटे पहले 5
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को चीन का दौरा करेंगे, जहां वह सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधि वार्ता में शामिल होंगे। इस बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय संबंधों और LAC पर तनाव कम करने को लेकर चर्चा की जाएगी।

बीजिंग में अहम कूटनीतिक बातचीत

भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी सीमा गतिरोध को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान वह भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर होने वाली विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भाग लेंगे। इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ उनकी सीधी बातचीत होगी, जो चीन के साथ सीमा मामलों के लिए विशेष प्रतिनिधि भी हैं। इस संवाद का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच उपजे सीमा विवाद के साथ-साथ आपसी संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करना है।

LAC पर शांति बहाली की कवायद

यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर तनाव को कम करने और सैन्य टकराव को पूरी तरह समाप्त करने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बाद से ही दोनों देशों के बीच राजनयिक और सैन्य स्तर पर संबंधों में एक बड़ी खटास आ गई थी। इस घटना के बाद पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में अपने सैनिकों और भारी सैन्य हथियारों की तैनाती कर दी थी, जिससे स्थिति काफी संवेदनशील बनी रही है।

समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास

पिछले कुछ वर्षों के दौरान सीमा पर तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इन तमाम वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य LAC पर सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया यानी डिसएंगेजमेंट सुनिश्चित करना और सीमाई क्षेत्रों में लंबे समय तक शांति एवं स्थिरता बनाए रखना रहा है।

राजनीतिक स्तर पर समाधान की तलाश

भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधियों की व्यवस्था का गठन सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान खोजने के उद्देश्य से किया गया था। यह एक बेहद महत्वपूर्ण तंत्र है, जहाँ भारत का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करते हैं और चीन का प्रतिनिधित्व उनके समकक्ष अधिकारी करते हैं। इसका लक्ष्य केवल सैन्य तनाव को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि सीमा से जुड़े विवादों का एक व्यापक और दीर्घकालिक राजनीतिक हल तलाशना भी है। बैठक के दौरान LAC की मौजूदा स्थिति, सीमा प्रबंधन और आपसी संबंधों से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

शांति ही संबंधों की बुनियाद

भारत ने हमेशा से इस बात पर जोर दिया है कि सीमा पर अमन और शांति ही दोनों देशों के संबंधों के सामान्य होने की पहली और बुनियादी शर्त है। वहीं चीन की ओर से भी इस बात को स्वीकार किया गया है कि सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाना आवश्यक है। डोभाल का यह दौरा इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वार्ता न केवल तत्काल सैन्य प्रबंधन का मंच है, बल्कि यह भविष्य में भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने में भी मददगार साबित हो सकता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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