सांप के काटने से नहीं जाएगी जान, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिए हर अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम रखने के निर्देश राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 4
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सांप के काटने से हुई मौतों के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों को दूरदराज के क्षेत्रों में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता अनिवार्य कर दी है।

सांप के काटने से मौतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त

भारत में सांप के काटने से होने वाली मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी संवेदनशील और दूरदराज के इलाकों में एंटी-स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सांप के शिकार किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े और उसे समय रहते जीवनरक्षक दवा मिल सके।

संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के निर्देश

NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में गठित पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सबसे पहले ऐसे क्षेत्रों की पहचान करें जहां सांप के काटने की घटनाएं अधिक होती हैं। आयोग ने इन क्षेत्रों का डेटा एकत्र करने और वहां पर तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा है। सरकार को अब यह रिपोर्ट देनी होगी कि इन क्षेत्रों में इलाज की क्या व्यवस्था की गई है और भविष्य में सांप के काटने के मामलों को रोकने के लिए क्या रणनीति अपनाई जा रही है।

आदिवासी छात्रावासों की सुरक्षा पर विशेष जोर

आयोग ने केवल सरकारी अस्पतालों तक ही अपनी चिंता सीमित नहीं रखी है, बल्कि उसने जंगलों और दूरदराज के इलाकों में स्थित आदिवासी आवासीय छात्रावासों, आश्रम शालाओं और अन्य आवासीय स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के भी कड़े निर्देश दिए हैं। आयोग के अनुसार, इन छात्रावासों में बुनियादी ढांचे में सुधार की सख्त जरूरत है। NHRC ने निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं:

  • छात्रों के लिए पर्याप्त बेड और सुरक्षित सोने की उचित व्यवस्था हो।
  • परिसर में चौबीसों घंटे वार्डन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती अनिवार्य हो।
  • पूरे छात्रावास परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
  • आपातकाल की स्थिति में तत्काल डॉक्टर और अस्पताल तक पहुंचने के लिए परिवहन सुविधा हो।

दो बड़ी घटनाओं के बाद लिया गया संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह निर्देश हाल ही में हुई दो दुखद घटनाओं के आधार पर लिया है। पहला मामला महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले का है, जहां एक आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में सांप के काटने से तीन छात्राओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद छात्रावास की लचर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए थे। दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट का है, जहां इलाज के दौरान समय पर एंटी-स्नेक वेनम न मिल पाने के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई थी। आयोग ने इन दोनों ही मामलों पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से निर्धारित समय के भीतर अपनी कार्य रिपोर्ट सौंपने को कहा है। सरकार को अब यह बताना होगा कि पीड़ितों के परिवारों को क्या राहत दी गई है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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