श्रावण पुत्रदा एकादशी: पूजा की तैयारी में न हो कोई कमी, नोट कर लें जरूरी सामग्री की पूरी सूची धर्म एक दिन पहले 7
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन संतान सुख और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाने वाली पूजा की पूरी सामग्री की जानकारी यहां विस्तार से दी गई है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाने वाली एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का पावन अवसर है। संतान प्राप्ति की कामना के साथ यह व्रत साल में दो बार आता है, एक पौष मास में और दूसरा श्रावण मास में। श्रावण में पड़ने वाली इस एकादशी का महत्व विशेष रूप से बढ़ जाता है क्योंकि यह सावन के महीने में आती है, जो स्वयं भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित है, जबकि एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना का विशेष दिन मानी जाती है।

साल 2026 में तिथियों का विवरण

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 को लेकर तिथियों का निर्धारण परंपरा के अनुसार अलग-अलग है। स्मार्त परंपरा का पालन करने वाले भक्त रविवार, 23 अगस्त 2026 को यह व्रत रखेंगे। वहीं, वैष्णव परंपरा को मानने वाले लोग सोमवार, 24 अगस्त 2026 को एकादशी का व्रत करेंगे। एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 अगस्त को रात 2 बजे से होगा और इसका समापन 24 अगस्त को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर होगा।

पवित्रा धागे का महत्व

पुत्रदा एकादशी की पूजा में पवित्रा या धागे की माला चढ़ाने की एक अनूठी परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु को यह अर्पित करने से वर्ष भर पूजा-पाठ में हुई अनजाने में हुई गलतियों का प्रायश्चित हो जाता है। कई भक्त पारंपरिक रूप से मौली या कलावा को ही पवित्रा का स्वरूप मानकर भगवान को समर्पित करते हैं।

पूजा सामग्री की विस्तृत सूची

पूजा को विधि-विधान से संपन्न करने के लिए सभी आवश्यक वस्तुओं को पहले से जुटा लेना शुभ रहता है। इससे पूजन कार्य में कोई बाधा नहीं आती। आप नीचे दी गई सूची के अनुसार अपनी तैयारी सुनिश्चित कर सकते हैं:

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या उनका चित्र
  • पूजा के लिए एक साफ चौकी
  • चौकी पर बिछाने के लिए शुद्ध पीला या लाल वस्त्र
  • शुद्ध जल और गंगाजल
  • दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत
  • ताजे पीले फूल और फूलों की माला
  • तुलसी के पत्ते और शमी पत्र
  • अक्षत यानी साबूत चावल
  • पीला चंदन
  • रोली और हल्दी
  • घी का दीपक, रुई की बत्ती
  • धूपबत्ती और माचिस
  • ऋतु फल और भोग के लिए मिठाई
  • पान का पत्ता, सुपारी, लौंग और छोटी इलायची
  • पूजा में उपयोग हेतु कलावा या मौली
  • शुद्ध भीमसेनी कपूर

पूजा शुरू करने से पहले मन को शांत रखें और श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु का ध्यान करें। इन सभी सामग्रियों के साथ विधिपूर्वक पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और व्रत पूर्ण माना जाता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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