हरतालिका तीज 2026: जानिए व्रत की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पालन किए जाने वाले नियम धर्म एक घंटा पहले 4
हरतालिका तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस साल यह त्योहार 14 सितंबर को मनाया जाएगा, जानिए पूजा की संपूर्ण विधि और जरूरी नियम।

हरतालिका तीज का महत्व

हरतालिका तीज को लोकप्रिय रूप से बड़ी तीज के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विशेष अवसर पर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखद जीवन की कामना करते हुए कठोर निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का पूजन किया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व के अलग-अलग नाम हैं, जैसे कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसे गौरी हब्बा के रूप में जाना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में यह त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सामान्यतः यह उत्सव गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले पड़ता है, लेकिन इस बार तिथियों के संयोग के कारण तृतीया और चतुर्थी तिथि एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे ये दोनों त्योहार एक ही दिन मनाए जाएंगे।

हरतालिका तीज 2026 तिथि और मुहूर्त

इस वर्ष हरतालिका तीज का पावन पर्व 14 सितंबर 2026, दिन सोमवार को मनाया जा रहा है। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 06:05 से 07:06 बजे तक रहेगा। भक्तों को इसी अवधि के भीतर पूजा संपन्न करना शुभ फलदायी माना गया है।

पूजन की विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यदि कोई व्यक्ति सुबह पूजा करने में असमर्थ है, तो वह प्रदोष काल में भी विधिवत पूजन कर सकता है। पूजा शुरू करने से पहले स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करना अनिवार्य है। तत्पश्चात बालू या मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर उनकी स्थापना करें। पूरी श्रद्धा और विधि विधान के साथ पूजन संपन्न करें और हरतालिका तीज की कथा का श्रवण करें। व्रत के दौरान पूरे दिन निर्जला रहा जाता है और रात भर जागरण करने का विशेष महत्व है। अगले दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर शिव-पार्वती की पुनः पूजा करें और उसके बाद ही व्रत का पारण करें।

व्रत के मुख्य नियम

  • इस कठिन व्रत में जल और अन्न का त्याग करना होता है। हालांकि जो महिलाएं गर्भवती हैं या अस्वस्थ हैं, वे अपनी स्थिति के अनुसार फलाहार ग्रहण कर सकती हैं।
  • व्रत के दौरान रात्रि में सोने की मनाही है, क्योंकि इस दिन पूरी रात जागरण करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
  • पूजा स्थल पर रात भर अखंड दीपक जलाए रखना अनिवार्य है।
  • महिलाओं को इस अवसर पर 16 शृंगार अवश्य करना चाहिए।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई स्त्री एक बार हरतालिका तीज का व्रत आरंभ कर देती है, तो उसे बीच में छोड़ना नहीं चाहिए और प्रतिवर्ष इसे पूरे नियम के साथ जारी रखना चाहिए।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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