गणेश चतुर्थी पर चांद देखने की मनाही क्यों है? जानें दर्शन का सही समय और बचाव के उपाय धर्म 7 घंटे पहले 4
गणेश चतुर्थी के अवसर पर चंद्रमा के दर्शन करने से जुड़े विशेष निषेध और कलंक चतुर्थी से जुड़ी मान्यताओं के बारे में पूरी जानकारी यहाँ दी गई है।

गणेश चतुर्थी और चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यताएं

संपूर्ण देश में गणेश चतुर्थी का त्योहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भक्त अपने घरों में बप्पा का स्वागत कर रहे हैं और विधि-विधान से पूजा अर्चना की जा रही है। आमतौर पर किसी भी शुभ कार्य में चंद्रमा के दर्शन शुभ माने जाते हैं, लेकिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी को लेकर परंपराएं बिल्कुल अलग हैं। इस खास दिन चंद्रमा को देखने की सख्त मनाही होती है। मान्यता है कि इस दिन चांद देखने से व्यक्ति पर झूठा कलंक लग सकता है, इसलिए इसे कलंक चतुर्थी या पत्थर चौथ के नाम से भी संबोधित किया जाता है। आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि चंद्रमा के दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए और अलग-अलग शहरों में इसके निकलने का समय क्या है।

14 सितंबर 2026 को चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

आज यानी 14 सितंबर 2026 को चंद्रोदय का समय सुबह 9 बजकर 6 मिनट है और चंद्रास्त का समय रात 8 बजकर 6 मिनट निर्धारित है। आकाश में चंद्रमा शाम 6 बजे के बाद से ही नजर आना शुरू हो जाएगा, इसलिए भक्तों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

विभिन्न शहरों के अनुसार चंद्रोदय और चंद्रास्त की सूची

  • नई दिल्ली: 09:06 AM से 08:04 PM
  • नोएडा: 09:01 AM से 08:08 PM
  • पटना: 08:24 AM से 07:41 PM
  • लखनऊ: 08:44 AM से 07:56 PM
  • मुबंई: 09:07 AM से 08:41 PM
  • जम्मू: 09:18 AM से 08:11 PM
  • जयपुर: 09:05 AM से 08:17 PM
  • चंडीगढ़: 09:07 AM से 08:06 PM
  • वाराणसी: 08:33 AM से 07:50 PM
  • कोटा: 09:02 AM से 08:19 PM
  • हैदराबाद: 08:41 AM से 08:04 PM
  • कोलकाता: 07:07 AM से 07:32 PM
  • कानपुर: 08:45 AM से 07:59 PM

चंद्र दर्शन का वर्जित समय

गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर 09:06 AM से लेकर 08:04 PM तक चंद्रमा को देखने से पूरी तरह बचना चाहिए। इस अवधि के दौरान चांद के दर्शन करना अशुभ माना गया है।

यदि गलती से चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो क्या करें

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति को मिथ्या दोष या झूठे कलंक का सामना करना पड़ सकता है। कहा जाता है कि इसी दोष के कारण भगवान श्रीकृष्ण पर भी स्यमन्तक मणि की चोरी का गलत आरोप लगा था। यदि अनजाने में आपसे आज चंद्रमा के दर्शन हो जाएं, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। आप इन उपायों का पालन कर सकते हैं:

सबसे पहले आप इस विशेष मंत्र का उच्चारण करें: सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

इसके अतिरिक्त, कई मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि यदि नजर चांद पर पड़ जाए, तो पास से एक छोटा पत्थर या कंकड़ उठाकर चंद्रमा की दिशा में फेंक देना चाहिए। इसके बाद श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश की आराधना करें और स्यमंतक मणि की कथा का पाठ करें। इन उपायों से दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है और भक्त विघ्नहर्ता की कृपा का पात्र बनता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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