बलराम जयंती 2026: जानिए इस साल कब है हल षष्ठी, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि धर्म 3 घंटे पहले 4
भाद्रपद माह में आने वाली बलराम जयंती का महत्व और उससे जुड़ी पूजा की सभी जानकारियां यहाँ विस्तार से दी गई हैं।

बलराम जयंती का धार्मिक महत्व

भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलराम जी की जयंती का पावन पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह के दौरान उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन को हल षष्ठी, बलदेव छठ और बलभद्र जयंती के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में यह शुभ अवसर सितंबर महीने में आ रहा है। यदि आप भी इस दिन भगवान बलराम की उपासना करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको सही तिथि, पूजा के श्रेष्ठ मुहूर्त और धार्मिक विधियों के बारे में विस्तार से जान लेना चाहिए।

बलराम जयंती 2026 की सही तिथि

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का आरंभ 16 सितंबर को सुबह 9 बजे से हो रहा है। यह तिथि 17 सितंबर को सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक बनी रहेगी। धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के नियमों के आधार पर, बलराम जयंती का पर्व 16 सितंबर 2026 को मनाना ही शास्त्रसम्मत और उचित माना गया है।

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

बलराम जी की पूजा के लिए इस दिन कई विशेष मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें साधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 ए एम से 05:39 ए एम तक
  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:16 ए एम से 06:26 ए एम तक
  • अमृत काल: सुबह 07:50 ए एम से 09:34 ए एम तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:36 पी एम से 03:24 पी एम तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:40 पी एम से 07:04 पी एम तक
  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:40 पी एम से 07:51 पी एम तक

पूजा करने की विधि

बलराम जयंती पर पूजा की संपूर्ण विधि का पालन करना अनिवार्य है। यहाँ पूजा के चरणों के बारे में बताया गया है:

  • सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजा स्थल पर भगवान बलराम की तस्वीर या प्रतिमा को विधिपूर्वक स्थापित करें।
  • हाथ में जल लेकर भगवान बलराम की पूजा और व्रत का संकल्प लें।
  • धूप, दीप और पुष्प अर्पित करके पूजा की शुरुआत करें।
  • भगवान को अक्षत, चंदन और दूध जैसी पवित्र वस्तुएं अर्पित करें।
  • बलराम जी को उनके प्रिय फल और मिठाइयों का भोग लगाना न भूलें।
  • पूजा के अंत में श्रद्धापूर्वक बलराम जी की आरती करें और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच प्रसाद बांटें।
  • यदि आपने इस दिन व्रत रखा है, तो शाम की आरती संपन्न होने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करें।
  • शास्त्रों में कहा गया है कि पूजा के दौरान प्रभु के हलधर स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से स्मरण करने पर भक्तों को बल, बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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