भारत
एक महीने पहले
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विचारों
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ता गतिरोध
नीट पेपर लीक प्रकरण ने देश भर में विरोध की लहर पैदा कर दी है। दिल्ली के जंतर मंतर समेत देश के अनेक हिस्सों में छात्रों और विभिन्न संगठनों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस मामले में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच गहराती खाई कम होने का नाम नहीं ले रही है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व को बातचीत की मेज पर आने का न्यौता दिया गया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया, जिसके चलते बातचीत की संभावनाएं फिलहाल समाप्त हो गई हैं। इससे पूर्व 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। उस चर्चा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत अपनी अन्य प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी थीं।
प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख शर्तें
आंदोलन को खत्म करने के लिए प्रदर्शनकारी गुटों ने सरकार के समक्ष तीन ठोस मांगे रखी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, इन मांगों को मानना सरकार के लिए अनिवार्य है। उनकी मांगों का विवरण इस प्रकार है:
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल प्रभाव से इस्तीफा लिया जाए।
- नीट पेपर लीक की घटनाओं से दुखी होकर आत्महत्या का रास्ता चुनने वाले सभी छात्रों के पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।
- शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई सभी अनावश्यक प्राथमिकी यानी FIR को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए, साथ ही सरकार इस बात की लिखित गारंटी दे कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी पर ऐसा मुकदमा नहीं दर्ज होगा।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े आंदोलनकारी
प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर कोई भी समझौता संभव नहीं है। उनका कहना है कि यह मांग उनके आंदोलन का केंद्र बिंदु है। जब तक सरकार शिक्षा मंत्री को पद से नहीं हटाती, तब तक यह विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकाल तक चलता रहेगा। सौरव दास ने जोर देकर कहा कि इस मांग के पूरी हुए बिना आंदोलन को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता, चाहे संघर्ष कितना भी लंबा क्यों न खिंच जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा आश्वासन
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए कहा कि पेपर लीक के मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए सरकार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने जा रही है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे इस दिशा में आवश्यक और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। प्रधानमंत्री ने विश्वास दिलाया कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार निर्णय लिए जा रहे हैं।
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