ड्रग माफिया पर केंद्र का बड़ा प्रहार: मोस्ट वॉन्टेड नवप्रीत सिंह तुर्की से भारत लाया गया भारत 11 घंटे पहले 3
भारत सरकार ने नशे के कारोबार में लिप्त कुख्यात तस्कर नवप्रीत सिंह को तुर्की से प्रत्यर्पित कर देश वापस बुला लिया है। इस सफलता के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने ड्रग्स के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।

तुर्की से भारत पहुंचा ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह

पंजाब में नशे के अवैध कारोबार में लिप्त मोस्ट वॉन्टेड अपराधी नवप्रीत सिंह को शनिवार के दिन भारत वापस लाया गया। तुर्की से उसे डिपोर्ट किए जाने के बाद भारत सरकार की सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में ले लिया है। इसे देश में ड्रग्स के खिलाफ जारी अभियान की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने पहले नक्सलवाद के खात्मे की समय-सीमा तय कर उसे पूरा किया था, और अब उन्होंने पूरे देश, विशेषकर पंजाब से नशे की जड़ को खत्म करने का दृढ़ संकल्प लिया है। स्पष्ट है कि अब नशा उन्मूलन केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक व्यक्तिगत मिशन की तरह है।

गृह मंत्री का बड़ा ऐलान

नवप्रीत सिंह की वापसी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर जानकारी देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नवप्रीत सिंह ने नवाब विर्क के नाम से फर्जी पहचान बनाकर तुर्की की नागरिकता हासिल कर ली थी। इसके बावजूद, वह अफगानिस्तान के रास्ते भारत में लगातार हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसे घातक नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहा था। भारतीय एजेंसियों ने सतर्कता दिखाते हुए उसकी असलियत को उजागर किया और उसे वापस भारत लाने में कामयाबी पाई। अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार दिसंबर, 2029 तक देश से हर ड्रग कार्टेल का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंजाब की राजनीति में ड्रग्स का मुद्दा

पंजाब की चुनावी राजनीति में नशे का मुद्दा हमेशा से ही केंद्र में रहा है। साल 2017 में जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब की राजनीति में कदम रखा था, तब नशे के खिलाफ जंग उनका मुख्य चुनावी वादा था। पार्टी ने पूरा चुनाव इसी एजेंडे पर लड़ा था। वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी धरातल पर नशा पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया। अब बीजेपी भी समझती है कि पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नशा उन्मूलन का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। हालांकि, बीजेपी पहले शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में रही है, ऐसे में अब देखना यह होगा कि पार्टी इस बार क्या नई रणनीति अपनाती है।

2027 चुनाव से पहले बढ़ता दबाव

आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, पंजाब में फिर से नशे का मुद्दा गरमाने लगा है। जनता के मन में यह सवाल है कि नशे के खिलाफ सरकार की लड़ाई आखिर किस स्तर तक सफल रही है। विरोधी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, लेकिन नशा तस्करी को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है, यह सवाल अब भी बरकरार है। इससे पहले जालंधर की एक जनसभा में अमित शाह ने जनता से नशा मुक्त पंजाब का वादा किया था और कहा था कि सरकार जो कहती है, उसे पूरा करके दिखाती है। अब इस कार्रवाई के बाद राज्य में नशे के खिलाफ एक कड़ी कानूनी जंग छिड़ना तय माना जा रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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