मिसाइल से भी तेज, 85 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ने वाला जासूसी प्लेन, क्या 27 साल बाद फिर लौटेगा SR-71 ब्लैकबर्ड? अमेरिका 4 घंटे पहले 2
दुनिया के सबसे तेज जासूसी विमान एसआर-71 ब्लैकबर्ड की आसमान में वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। नासा के बयानों और विमान के अचानक गायब होने से इस बात को बल मिल रहा है कि 27 साल बाद यह दिग्गज विमान फिर उड़ान भर सकता है, हालांकि तकनीकी चुनौतियां अभी भी बहुत बड़ी हैं।

आसमान का नया रोमांच या पुरानी यादें

विमानन जगत के इतिहास में लॉकहीड एसआर-71 ब्लैकबर्ड एक ऐसे नाम के रूप में दर्ज है, जिसे आज भी कोई पछाड़ नहीं सका है। करीब 27 साल पहले रिटायर हो चुका यह दुनिया का सबसे तेज जासूसी विमान क्या एक बार फिर बादलों को चीरने की तैयारी कर रहा है? यह सवाल पिछले कुछ समय से रक्षा विशेषज्ञों और विमानन के शौकीनों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। इस बहस को तब और मजबूती मिली जब नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन ने इस ऐतिहासिक एयरक्राफ्ट को फिर से सेवा में बहाल करने की अपनी इच्छा जाहिर की।

हाल ही में लॉस एंजिल्स में संपन्न हुए ऑल-इन समिट के दौरान इसाकमैन ने एक प्रेजेंटेशन दी थी, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। इस प्रेजेंटेशन में दिखाए गए नए एयरक्राफ्ट का टेल सेक्शन, कॉकपिट और इंजन का डिजाइन हूबहू लीजेंड्री एसआर-71 ब्लैकबर्ड जैसा दिख रहा था। इसाकमैन ने स्पष्ट रूप से कहा कि नासा जल्द ही एक बार फिर उन ऊंचाइयों को छुएगा और वैसी ही गति हासिल करेगा जैसी दशकों पहले हुआ करती थी। इस बयान के बाद दुनियाभर के डिफेंस और स्पेस विशेषज्ञों के बीच यह जिज्ञासा बढ़ गई है कि आखिर नासा इस पुराने जासूस को फिर से क्यों जीवित करना चाहता है और क्या यह 27 साल बाद फिर से आसमान में मंडराएगा?

एसआर-71 ब्लैकबर्ड का बेमिसाल इतिहास

एसआर-71 ब्लैकबर्ड को एविएशन की दुनिया का अजूबा कहा जाता है। इसने अपनी पहली उड़ान 22 दिसंबर 1964 को भरी थी। इसके बाद जनवरी 1966 में अमेरिकी वायुसेना ने इसे आधिकारिक तौर पर अपने बेड़े में शामिल किया। अमेरिकी वायुसेना के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि अपने करीब 24 साल के सेवाकाल के दौरान यह विमान दुनिया का सबसे तेज और सबसे अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाला एयरक्राफ्ट बना रहा। 28 जुलाई 1976 को इस विमान ने अपनी श्रेणी में दो ऐसे विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए, जो आज भी कायम हैं। उस समय इसने 2,193 मील प्रति घंटा यानी लगभग 3,529 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दर्ज की थी। यही नहीं, यह विमान 85,068 फीट की अद्भुत ऊंचाई तक पहुंचने में सक्षम था। 9 अक्टूबर 1999 को इस विमान ने अपनी अंतिम उड़ान भरी और इसे इतिहास का हिस्सा मानते हुए रिटायर कर दिया गया था।

गायब होने का रहस्य और नया सस्पेंस

इस विमान के अचानक सुर्खियों में आने का एक बड़ा कारण इसका अपनी जगह से गायब हो जाना है। साल 1999 में सेवा से हटने के बाद टेल नंबर 844 वाले ब्लैकबर्ड को एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस के पास नासा आर्मस्ट्रांग में एक डिस्प्ले के रूप में रखा गया था। सालों तक यह विमान खुले आसमान के नीचे एक शोपीस की तरह खड़ा रहा। लेकिन मई के महीने में जब सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं, तो पता चला कि यह विमान अपनी निर्धारित जगह पर मौजूद ही नहीं है। इस अचानक गायब होने की घटना ने कई अटकलों को जन्म दिया है। सूत्रों का दावा है कि विमान को डिस्प्ले से हटाकर एक विशेष हैंगर में शिफ्ट किया गया है, ताकि इसका निरीक्षण किया जा सके। हालांकि, नासा ने अभी तक विमान की वर्तमान स्थिति या उसके स्थानांतरण के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

नासा की राह में तकनीकी चुनौतियां

क्या किसी 27 साल पुराने सुपरसोनिक विमान को दोबारा हवा में ले जाना मुमकिन है? विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट तकनीकी दृष्टि से एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस नामुमकिन मिशन को हकीकत में बदलने के लिए नासा उन पुराने टेस्ट इंजीनियरों की तलाश कर रहा है, जिन्होंने कभी ब्लैकबर्ड पर काम किया था। पूर्व अमेरिकी नेवी और जोबी टेस्ट पायलट डेविड ऐश ने एयरफोर्स और नासा के पूर्व टेस्ट इंजीनियर माइक रेलजा से इस सिलसिले में संपर्क किया। माइक रेलजा, जो अब 70 वर्ष के हो चुके हैं, ने बताया कि नासा का बुलावा सुनकर वे खुद हैरान थे। उन्होंने अपनी टीम को साफ कह दिया कि वे इस काम के लिए काफी वृद्ध हो चुके हैं। उन्होंने अपनी शुभकामनाएं देते हुए यह भी कहा कि इस विमान को दोबारा उड़ते देखना वाकई रोमांचक होगा, लेकिन वे इसे दोबारा उड़ाने की संभावना पर बहुत आशान्वित नहीं हैं।

जंग खाए इंजन और मेंटेनेंस का सवाल

माइक रेलजा ने टेल नंबर 844 को दोबारा चालू करने की राह में आने वाली बड़ी तकनीकी बाधाओं का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह विमान पिछले 27 वर्षों से जमीन पर खड़ा है। खुले में रखे होने के कारण, लंबे समय तक बारिश और रेगिस्तानी रेत की मार झेलने के कारण इसकी स्थिति काफी खराब हो सकती है। ब्लैकबर्ड में दो मुख्य इंजन होते हैं और नीचे एक स्पेयर इंजन लगा होता है। जब यह विमान सेवा में था, तब हर 90 दिन में स्पेयर इंजन को रोटेट करना जरूरी होता था और हर 180 दिन में उसे चालू करके टेस्ट किया जाता था। अब पिछले 30 वर्षों से ये इंजन बिना किसी मेंटेनेंस या मूवमेंट के बंद पड़े हैं, जिससे उन्हें दोबारा चालू करना बेहद जोखिम भरा काम हो सकता है।

स्पेयर पार्ट्स का अकाल

इस मिशन के सामने सबसे बड़ी समस्या स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी है। साल 2007 में अमेरिकी वायुसेना और नासा ने मिलकर ब्लैकबर्ड के करीब 600 मिलियन डॉलर के स्पेयर पार्ट्स को नष्ट कर दिया था। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि भविष्य में इस विमान की दोबारा कभी जरूरत पड़ेगी। अब नासा को उन पार्ट्स को स्क्रैच से दोबारा बनाना होगा या दुनिया भर में उनकी तलाश करनी होगी। इसके अलावा, विमान को स्टार्ट करने के लिए ट्राईइथाइलबोरेन जैसे विशेष रसायन की जरूरत होती है, जो इंजन में इग्निशन के लिए अनिवार्य है। इंजन ऑयल और हाइड्रोलिक फ्लूइड जैसे विशिष्ट तरल पदार्थ भी आम बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। पूर्व टेस्ट इंजीनियर टिम कॉनर्स ने भी इस प्रोजेक्ट पर काम करने से मना कर दिया है, हालांकि उन्होंने भी अपनी उम्मीद जताई है। फिलहाल नासा के प्रवक्ता ने केवल इतना कहा है कि वे एसआर-71 को लेकर लोगों के उत्साह को समझते हैं, लेकिन अभी उनके पास साझा करने के लिए कोई ठोस नई जानकारी नहीं है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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