उत्तराखंड
एक घंटा पहले
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्वतीय शहर नैनीताल के पहाड़ों पर एक बार फिर गंभीर भूगर्भीय संकट मंडराने लगा है। बलियानाला और कृष्णापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से जारी भूधंसाव के बाद, अब आलूखेत की पहाड़ी में भी नई हलचल देखी गई है। यहाँ बड़े पैमाने पर जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएँ सामने आने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ भूगर्भ वैज्ञानिक भी चिंता में हैं।
भवाली रोड और आसपास के इलाकों पर खतरा
भूगर्भ विज्ञानियों के मुताबिक, आलूखेत में हो रही यह हलचल केवल इस विशिष्ट हिस्से तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। इसका सीधा और बड़ा असर भवाली रोड और उससे सटे अन्य संवेदनशील इलाकों पर पड़ सकता है। पहाड़ी के खिसकने से इस महत्वपूर्ण सड़क मार्ग और आसपास की बस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुराने लैंडस्लाइड जोन पर बसा है शहर
विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि नैनीताल की कई पहाड़ियाँ प्राकृतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं। यहाँ की भौगोलिक संरचना ऐसी है कि शहर का एक बड़ा हिस्सा दशकों पुराने भूस्खलन क्षेत्रों यानी पुराने लैंडस्लाइड जोन के ऊपर बसा हुआ है। ऐसे में इन क्षेत्रों में होने वाली छोटी सी हलचल भी बड़े विनाश का कारण बन सकती है।
इस संकट को देखते हुए वैज्ञानिकों ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- संवेदनशील घोषित किए जा चुके पहाड़ी इलाकों की चौबीसों घंटे लगातार निगरानी की जानी चाहिए।
- भूधंसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए इन क्षेत्रों का तुरंत और गहन वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया जाए।
- पहाड़ी ढलानों पर बढ़ रहे दबाव को कम करने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं।
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