बिहार
14 घंटे पहले
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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसा घर है जहां की छत पर पक्षियों का एक अनोखा संसार बसता है। मुजफ्फरपुर शहर के प्रसिद्ध गरीबस्थान मंदिर के पास रहने वाले 57 वर्षीय राज कुमार राजू का कबूतरों के प्रति लगाव किसी मिसाल से कम नहीं है। उनके लिए कबूतरों को पालना केवल एक साधारण शौक नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार की तीन पीढ़ियों से चली आ रही एक अनमोल विरासत है। वर्तमान में राज कुमार राजू के घर की सबसे ऊपरी मंजिल पर बने बड़े से कबूतरखाने में करीब 500 कबूतरों का बसेरा है, जो उनके पूरे दिन की चहल-पहल का मुख्य केंद्र हैं।
पारिवारिक विरासत और दोबारा शुरुआत की कहानी
राज कुमार राजू के परिवार में कबूतर पालने का सिलसिला बहुत पुराना है। हालांकि, बीच में एक ऐसा समय भी आया जब उन्होंने कबूतर पालना बंद कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2012 में उनके साथ एक बड़ी सड़क दुर्घटना घटी। इस हादसे के बाद उन्होंने अपने जीवन में एक बार फिर बदलाव लाने का निश्चय किया। उन्होंने अपने पुराने शौक को दोबारा जीवित करने का मन बनाया और उत्तर प्रदेश के वाराणसी जाकर करीब 100 कबूतर खरीदकर ले आए। इसके बाद कबूतरों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई और आज उनके आशियाने में दोबारा करीब 500 कबूतर मौजूद हैं, जो इस विरासत को और भी समृद्ध बना रहे हैं।
लाखों की कीमत और अनोखी नस्लों का शानदार संग्रह
राज कुमार राजू के इस कबूतरखाने में कोई साधारण कबूतर नहीं, बल्कि देश-विदेश की कई बेहतरीन नस्लें मौजूद हैं। उनके पास इस समय लगभग 30 से 40 नस्लों के कबूतरों का एक दुर्लभ संग्रह है। इन शानदार नस्लों में मुख्य रूप से यह कबूतर शामिल हैं:
- टेडी
- कमगर
- सेवेवाला
- फीका
- कलसिडा
- रामपुरी
- ताम्रा
- हरा
- जाग
- कल्पूटिया
राजू बताते हैं कि इन पक्षियों की कीमत उनकी नस्ल, खूबियों और उनकी खास उड़ान भरने की क्षमताओं के आधार पर तय की जाती है। उनके पास मौजूद कबूतरों की जोड़ियों में सबसे अनमोल और महंगी जोड़ी की कीमत करीब दो लाख रुपये है। कबूतरों की यह जोड़ी अपनी श्रेणी में बेहद खास मानी जाती है।
आसमान की ऊंचाइयों में 11 घंटे तक उड़ान भरने का दम
राज कुमार राजू अपने इन कबूतरों को केवल घर की छत तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि वे इन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार कर रहे हैं। उनका सपना है कि उनके ये कबूतर देश की सबसे बड़ी प्रतियोगिताओं में शामिल हों और अपनी काबिलियत साबित करें। उनके पास एक ऐसा ही जांबाज कबूतर है जो उनकी उम्मीदों को पंख दे रहा है।
राजू का दावा है कि उनके पास मौजूद कलसीरा मकोय नस्ल के एक बेहतरीन कबूतर ने मुजफ्फरपुर में आयोजित स्थानीय स्तर की एक प्रतियोगिता में लगातार करीब 11 घंटे तक आसमान में उड़ान भरकर सबको हैरान कर दिया था। यह कबूतर हवा में लगभग पांच हजार फीट की ऊंचाई तक जाने की क्षमता रखता है।
कठिन परिश्रम और धैर्य की मांग करता है यह शौक
कबूतरों की इतनी बड़ी संख्या को संभालना कोई आसान काम नहीं है। राज कुमार राजू का कहना है कि इतने सारे पक्षियों की सही तरीके से देखभाल करने के लिए प्रतिदिन बहुत अधिक समय, कड़ी मेहनत और अटूट धैर्य की आवश्यकता होती है। उनके लिए ये कबूतर महज जीव-जंतु नहीं हैं, बल्कि वे इन्हें अपने परिवार का एक अहम हिस्सा मानते हैं। तीन पीढ़ियों के इस पारिवारिक सफर को आगे बढ़ाते हुए राजू का अब एकमात्र लक्ष्य अपने इन कबूतरों को ऑल इंडिया स्तर की प्रतियोगिताओं में उतारना और वहां जीत हासिल कर इस शौक को एक नई राष्ट्रीय पहचान दिलाना है।
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