मुजफ्फरपुर में बुजुर्ग पिता और बेटे बने 10 मिनट के अरबपति, खाते में आए 15 अरब रुपये बिहार एक महीने पहले 79
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग और उनके दिव्यांग बेटे के बैंक खाते में अचानक 15 अरब रुपये दिखाई देने लगे। हालांकि, 10 मिनट के भीतर ही यह पूरी राशि वापस गायब हो गई।

अचानक बैंक खाते में आई अरबों की रकम

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला वाकया सामने आया है, जिसने हर किसी को चौंका कर रख दिया है। मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड स्थित थतिया सीहो गांव के एक बुजुर्ग और उनके दिव्यांग बेटे के बैंक खाते में अचानक 15 अरब रुपये यानी 1500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की राशि दिखाई देने लगी। हालांकि, यह खुशी कुछ ही पलों की रही और देखते ही देखते यह पूरी रकम बैंक के खाते से गायब हो गई। स्थानीय लोग इसे तकनीकी खामी मान रहे हैं, लेकिन 10 मिनट के लिए ही सही, इस गरीब परिवार का अरबपति बनना इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

गिनती करने में ही निकल गए कई मिनट

इस पूरी घटना की शुरुआत तब हुई जब 82 वर्षीय कामेश्वर मिश्र, जिन्हें इलाके में 'घुमक्कड़' के नाम से भी जाना जाता है, अपने दिव्यांग बेटे के साथ गांव के ही एक ग्राहक सेवा केंद्र पर पेंशन की राशि लेने पहुंचे थे। कामेश्वर मिश्र ने अपनी वृद्धावस्था पेंशन के 1100 रुपये और उनके बेटे ने अपनी दिव्यांग पेंशन की रकम निकाली। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन इसके बाद जब उन्होंने अपने खातों का शेष बैलेंस चेक करवाया, तो स्क्रीन पर दिख रहे आंकड़ों ने वहां मौजूद सभी लोगों के होश उड़ा दिए।

बैंक के कंप्यूटर स्क्रीन पर पिता और पुत्र के खातों में अलग-अलग 7,59,69,51,951 रुपये यानी लगभग 7.59 अरब रुपये प्रति खाता शो हो रहा था। दोनों खातों की कुल राशि मिलाकर लगभग 15 अरब रुपये हो रही थी। यह राशि इतनी बड़ी थी कि केंद्र पर मौजूद लोग करीब 4 से 5 मिनट तक तो केवल स्क्रीन पर दिख रहे अंकों को ही गिनते रहे और इकाई-दहाई का हिसाब लगाते रहे। जब यह स्पष्ट हो गया कि स्क्रीन पर दिख रही संख्या वास्तव में अरबों में है, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की हैरानी का ठिकाना नहीं रहा।

लेनदेन का प्रयास हुआ विफल

खाते में इतनी बड़ी रकम देखकर केंद्र संचालक ने तुरंत यह जांचने का प्रयास किया कि क्या यह पैसा वास्तव में निकाला जा सकता है। संचालक ने ट्रांजेक्शन की कोशिश की, लेकिन हर बार तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए लेनदेन फेल हो गया। यह साफ हो गया कि यह सिर्फ एक तकनीकी चूक थी, जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं था।

10 मिनट बाद वापस हुए शून्य

बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र के लिए यह एक सपने जैसा था। उन्हें लगा कि शायद उनकी वर्षों पुरानी आर्थिक तंगी अब हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, लेकिन उनकी यह खुशी मात्र 10 मिनट की ही थी। जब लगभग 10 मिनट बाद सीएसपी संचालक ने दोबारा बैंक खाते का बैलेंस चेक किया, तो अरबों की वह राशि पूरी तरह से गायब हो चुकी थी। खाते का बैलेंस फिर से शून्य हो गया। अचानक मिले अरबों के सपने ताश के पत्तों की तरह बिखर गए और बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र मायूसी में सिर पकड़कर बैठ गए। अब पूरे इलाके में इस बुजुर्ग को लोग मजाक में '10 मिनट का अरबपति' कहकर बुला रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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