मुंबई में सक्रिय हुआ 'कोडवर्ड' जेबकतरा गैंग: 'चाचा ने सलाम किया' कहते ही समझ जाएं कि आपकी जेब खतरे में है महाराष्ट्र एक घंटा पहले 4
मुंबई के अंधेरी में पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है जो व्हाट्सऐप और गुप्त कोडवर्ड के जरिए वारदातों को अंजाम देता था। यह गैंग बसों में भीड़ का फायदा उठाकर यात्रियों के कीमती मोबाइल फोन पार कर देता था।

अंधेरी में पुलिस का बड़ा खुलासा

मुंबई पुलिस ने हाल ही में जेबकतरे गिरोह के एक ऐसे नेटवर्क का भांडाफोड़ किया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया है। अंधेरी इलाके में सक्रिय इस गैंग का काम करने का तरीका बेहद आधुनिक और शातिर था। वे चोरी की वारदातों को अंजाम देने के लिए सामान्य लगने वाले वाक्यों को कोडवर्ड की तरह इस्तेमाल करते थे। जब भी गैंग के सदस्य आपस में 'चाचा ने सलाम किया' या 'आज मौसम कैसा है?' जैसी बातें करते थे, तो इसका सीधा मतलब होता था कि वे अपने अगले शिकार की तलाश में हैं या फिर किसी विशेष गतिविधि को शुरू करने का संकेत दे रहे हैं। एमआईडीसी पुलिस की गहन जांच में यह सामने आया है कि ये शब्द केवल बातचीत नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध का हिस्सा थे।

व्हाट्सऐप के जरिए होता था गैंग का संचालन

इस गिरोह की कार्यप्रणाली पुराने जमाने के जेबकतरों से काफी अलग और तकनीक पर आधारित थी। पुलिस के मुताबिक, इस गैंग का सरगना हर सुबह व्हाट्सऐप के जरिए अपने सदस्यों से संपर्क स्थापित करता था। इन संदेशों के जरिए ही तय किया जाता था कि उस दिन गैंग को किस बस रूट पर और किन इलाकों में सक्रिय रहना है। सबसे बड़ी बात यह है कि गिरोह का कोडवर्ड हर दिन बदल दिया जाता था, जिससे पुलिस या किसी बाहरी व्यक्ति को उनकी बातचीत का असली मकसद समझ न आए। जब पुलिस ने इस गैंग के कुछ सदस्यों को धर दबोचा, तो बाकी आरोपी तुरंत सतर्क हो गए और अंधेरी छोड़कर नवी मुंबई के जुईनगर इलाके में जाकर छिप गए, जो उनके तकनीकी रूप से जागरूक होने का सबूत है।

कैसे काम करता था 'धक्का गैंग'

इस गिरोह के सदस्यों की भूमिकाएं पहले से ही निश्चित होती थीं। भीड़भाड़ वाली बसों में चढ़ने के बाद गैंग के सदस्य अलग-अलग तरीके से काम बांट लेते थे। कोई सदस्य यात्री पर अपनी नजर बनाए रखता था, तो दूसरा जानबूझकर धक्का-मुक्की करके पीड़ित का ध्यान भटकाने का काम करता था। जैसे ही यात्री का ध्यान भटकता, तीसरा सदस्य बड़ी सफाई से उसका मोबाइल या पर्स निकाल लेता था। पुलिस ने जब इनसे पूछताछ की तो पता चला कि ये लोग एक दिन में करीब 5 महंगे मोबाइल फोन तक पार कर देते थे। पुलिस की छापेमारी में इस गैंग के पास से कुल 135 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इन फोन्स की कीमत का अनुमान 90 हजार से लेकर 1.5 लाख रुपये के बीच लगाया गया है।

आईफोन को क्यों छोड़ते थे अपराधी

जांच के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि यह गैंग आमतौर पर आईफोन को निशाना नहीं बनाता था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आईफोन की सुरक्षा प्रणाली काफी मजबूत होती है और उसे अनलॉक करना या फिर उसकी अनधिकृत बिक्री करना सामान्य एंड्रॉइड फोन की तुलना में अधिक जटिल होता है। यही कारण है कि अपराधी गिरोह उन फोन्स को अधिक प्राथमिकता देते थे जिन्हें आसानी से बेचा जा सके और जिनका बाजार में जल्दी ग्राहक मिल जाए।

बदलते वक्त के साथ बदले चोरों के तरीके

मुंबई में अपराध का यह नया तरीका उन पुराने दिनों की याद दिलाता है जब अपराधी इशारों का इस्तेमाल करते थे। 1990 के दशक में जेबकतरों के गिरोह आंखों के संकेतों, तौलिये को हिलाने या किसी खास व्यक्ति का नाम जोर से पुकारने जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते थे। उस समय सादे कपड़ों में घूम रहे पुलिसकर्मियों की सूचना देने के लिए भी अलग-अलग इशारे बनाए गए थे। आज भी गिरोह चोरी के बाद तुरंत अलग-अलग बस स्टॉप पर उतर जाते हैं, ताकि यदि कोई एक पकड़ा जाए तो बाकी पूरी टीम सुरक्षित रहे। उस समय के अपराधी अपनी चोरी की घटना को 'जादू' या 'झटका' जैसे नामों से बुलाते थे, जो कि एक तरह का कोड ही था।

आम यात्रियों के लिए चेतावनी

पुलिस ने आम जनता को सलाह दी है कि सार्वजनिक परिवहन में सफर करते समय बेहद सतर्क रहें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर अगर आपको आसपास के लोगों की बातचीत में कुछ अजीब या सामान्य से हटकर वाक्य सुनाई दें, तो तुरंत अपनी जेब और सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करें। गिरोह अक्सर ऐसे वाक्यों का चयन करते हैं जो लोगों को संदिग्ध न लगें। एमआईडीसी पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है ताकि इनसे जुड़े अन्य अपराधियों को भी पकड़ा जा सके। यह पूरा मामला इस बात का प्रमाण है कि भले ही तकनीक बदल गई हो और स्मार्टफोन ने हाथों के इशारों की जगह ले ली हो, लेकिन अपराधी अब भी अपनी आदतों को छिपाने के लिए नई भाषा गढ़ रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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