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35 मिनट पहले
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इरबिल में धमाकों से मची अफरातफरी
मंगलवार की सुबह उत्तरी इराक का इरबिल शहर कई शक्तिशाली धमाकों की आवाज से गूंज उठा। इन हमलों का मुख्य केंद्र इरबिल का वह इलाका था जहां अमेरिकी वाणिज्य दूतावास स्थित है। स्थानीय पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन हमलों के पीछे ईरान के ड्रोनों का हाथ है। ईरान ने अपने ड्रोनों के जरिए इरबिल के उत्तर-पूर्व में स्थित खलीफान और सोरान जैसे प्रमुख इलाकों को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद प्रभावित क्षेत्रों में भीषण आग की लपटें देखी गईं, जिससे स्थानीय लोगों में काफी दहशत फैल गई। पुलिस ने पुष्टि की है कि हमले में शामिल कम से कम दो ड्रोन अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गए।
लड़ाकू विमानों की गश्त और गैस फील्ड पर निशाना
इराकी स्थानीय मीडिया और अल जजीरा की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इरबिल में कुल 7 से ज्यादा धमाके सुनाई दिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आकाश में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों की हलचल तेज हो गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि करीब 10 से ज्यादा अमेरिकी विमान इस समय इरबिल के ऊपर निगरानी कर रहे हैं। इन हमलों का दायरा काफी बड़ा है, क्योंकि इराक के अन्य हिस्सों से भी सैन्य गतिविधियों की खबरें आ रही हैं। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक, अल-अनबार प्रांत में एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया गया है, और इसकी तस्वीरें हदीथा बांध के पास से सामने आई हैं। इसके साथ ही, सुलेमानियाह स्थित खोर मोर गैस फील्ड पर भी सुनियोजित तरीके से हमला किया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और तनाव की पृष्ठभूमि
ये ताजा सैन्य हमले ऐसे नाजुक वक्त में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि यदि मौजूदा कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ बेहद सख्त सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने ईरान पर होने वाले पूर्व-निर्धारित हमलों को फिलहाल इसलिए रोक दिया है ताकि बातचीत को एक और अवसर मिल सके। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इन कूटनीतिक वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना और परमाणु समझौते को लेकर एक नई राह तलाशना है। लेकिन इन हमलों ने शांति वार्ता की राह में बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
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