बिहार
एक घंटा पहले
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मोतिहारी में रिंकू पाठक के ठिकानों पर दबिश
बिहार के मोतिहारी जिले में भारतीय जनता पार्टी के नेता रिंकू पाठक के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने एक बड़ी कार्रवाई शुरू की है। रविवार सुबह से ही EOU की अलग-अलग टीमें मोतिहारी और केसरिया स्थित रिंकू पाठक के निजी आवास और गैस एजेंसी सहित कई व्यावसायिक ठिकानों पर सघन तलाशी ले रही हैं। इस छापेमारी को लेकर इलाके में भारी चर्चा है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला
आर्थिक अपराध इकाई की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, रिंकू पाठक और उनकी पत्नी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जुटाने के गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि रिंकू पाठक ने अपनी वैध आय से बहुत अधिक संपत्ति बनाई है। आंकड़ों के मुताबिक, उन पर 3 करोड़ 56 लाख 65 हजार 118 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। यह राशि उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से करीब 124.81 प्रतिशत अधिक आंकी गई है।
पिछले 10 सालों में बढ़ी संपत्ति
जांच एजेंसी को इस संबंध में शिकायतें मिली थीं कि पिछले 10 साल के अंतराल में रिंकू पाठक की संपत्ति और उनके कारोबार में असामान्य उछाल आया है। शिकायतों में विशेष रूप से यह जिक्र था कि मोतिहारी और केसरिया जैसे इलाकों में उन्होंने अकूत संपत्ति खरीदी है। इन्हीं शिकायतों को आधार बनाकर आर्थिक अपराध इकाई ने एक विस्तृत जांच शुरू की, जिसके बाद यह छापेमारी की कार्रवाई की गई है। टीम वर्तमान में उन सभी दस्तावेजों को खंगाल रही है जो उनकी चल-अचल संपत्ति और व्यावसायिक निवेश से संबंधित हैं।
कौन हैं रिंकू पाठक?
रजनीश कुमार पाठक, जिन्हें स्थानीय स्तर पर रिंकू पाठक के नाम से जाना जाता है, केसरिया नगर पंचायत के वार्ड नंबर 7 से पार्षद हैं। उनकी पत्नी किरण देवी केसरिया नगर पंचायत की मुख्य पार्षद के पद पर काबिज हैं। रिंकू पाठक स्वयं भी पूर्व में नगर पंचायत के मुख्य पार्षद रह चुके हैं। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और पिछले एक दशक में उनके आर्थिक विकास के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
पुलिस बल की तैनाती और तलाशी
छापेमारी की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए रिंकू पाठक के घर और गैस एजेंसी के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। किसी भी बाहरी व्यक्ति का वहां पहुंचना फिलहाल वर्जित कर दिया गया है ताकि EOU की टीम शांति से दस्तावेजों की जांच कर सके। हालांकि, छापेमारी के दौरान अभी तक क्या-क्या अहम दस्तावेज या साक्ष्य हाथ लगे हैं, इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। एजेंसी का कहना है कि तलाशी अभियान पूरी तरह संपन्न होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
विवादों से पुराना नाता
रिंकू पाठक का नाम पूर्व में भी विवादों में रह चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वे रंगदारी मांगने जैसे गंभीर मामलों में पहले भी कानून के दायरे में आ चुके हैं और उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी है। वे सहरसा जेल में भी बंद रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद उनके व्यापारिक साम्राज्य में काफी विस्तार देखा गया, जिसकी अब आर्थिक अपराध इकाई बारीकी से जांच कर रही है।
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