बिहार
एक महीने पहले
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विचारों
संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी
बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इस परीक्षा में पूर्वी चंपारण जिले की शगुफ्ता फिरदौस ने अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर सफलता का परचम लहराया है। शगुफ्ता का चयन जिला श्रम कल्याण पदाधिकारी के पद पर हुआ है। हरसिद्धि प्रखंड के औरैया मुरारपुर गांव की रहने वाली शगुफ्ता ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधन भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकते।
सिलाई का काम करने वाले पिता का सपना हुआ साकार
शगुफ्ता की सफलता के पीछे एक कठिन संघर्ष की गाथा है। उनके पिता सिराजुल हक अंसारी पेशे से एक दर्जी हैं। उन्होंने सिलाई का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण किया और आर्थिक तंगियों के बावजूद अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। परिवार की मेहनत और बेटी के बड़े सपनों ने आज उन्हें यह गौरवपूर्ण मुकाम दिलाया है।
मां की प्रेरणा और खुद की रणनीति
अपनी कामयाबी का श्रेय देते हुए शगुफ्ता ने बताया कि उनकी मां बचपन से ही उन्हें पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहीं। शगुफ्ता ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था। उन्होंने सही रणनीति के साथ तैयारी की और अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी की कठिन परीक्षा पास कर ली।
अब समाज और राज्य के लिए काम करने का लक्ष्य
अधिकारी बनने के बाद शगुफ्ता ने कहा कि यह सिर्फ एक नौकरी नहीं है, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे अपनी प्रशासनिक भूमिका में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करेंगी। उनका मुख्य उद्देश्य समाज के जरूरतमंद और कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
गांव में छाई खुशी की लहर
शगुफ्ता की इस उपलब्धि पर उनके गांव और पूरे जिले में जश्न का माहौल है। स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों का मानना है कि शगुफ्ता का चयन ग्रामीण अंचल की उन तमाम बेटियों के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जीवन में कुछ बड़ा करने का सपना देखती हैं। उनकी सफलता ने यह सिद्ध किया है कि कड़ी लगन से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।
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