भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: खुद को मृतक का भाई बताने वाले सिपाही पर गिरी गाज, मोतिहारी एसपी ने किया सस्पेंड बिहार एक महीने पहले 63
भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में खुद को मृतक का भाई बताने वाले मोतिहारी पुलिस के सिपाही आशीष कुमार तिवारी को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के बाद अब पुलिस महकमे में एक बड़ी विभागीय कार्रवाई देखने को मिली है। मोतिहारी पुलिस लाइन में तैनात सिपाही आशीष कुमार तिवारी के खिलाफ पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सिपाही पर आरोप है कि उन्होंने विभाग के सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया है।

खुद को बताया था भाई

यह पूरा मामला तब गरमाया जब सिपाही आशीष कुमार तिवारी ने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर खुद को मृतक भरत तिवारी का भाई होने का दावा किया। इस दौरान उन्होंने कई विवादित बयान दिए, जो देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गए। इतना ही नहीं, विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ के बीच सिपाही ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने तक की धमकी दे डाली थी। उनके इन बयानों को न केवल सोशल मीडिया पर काफी जगह मिली, बल्कि कई मीडिया संस्थानों ने भी उन्हें प्रसारित किया।

एसपी ने दिए थे जांच के आदेश

सिपाही द्वारा दिए गए बयानों का संज्ञान लेते हुए पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने मामले की गहन जांच के निर्देश दिए। इस जांच की जिम्मेदारी संबंधित डीएसपी को सौंपी गई थी। एसपी स्वर्ण प्रभात ने पुष्टि की है कि डीएसपी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में सिपाही के आचरण को पुलिस सेवा के नियमों के विरुद्ध पाया गया है। रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनहीनता के दोषी पाए जाने के बाद आशीष कुमार तिवारी को निलंबित कर दिया गया है।

अनुशासनहीनता का रहा है पुराना रिकॉर्ड

विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आशीष कुमार तिवारी का अतीत भी अनुशासनहीनता के मामलों से भरा रहा है। इससे पहले जब वे पिपराकोठी और हरपुर थाना क्षेत्रों में तैनात थे, तब भी उन पर ड्यूटी में लापरवाही और अनुशासन तोड़ने के आरोप लगे थे। जांच प्रक्रिया के दौरान पुलिस विभाग की ओर से सिपाही को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, लेकिन वे कोई भी संतोषजनक स्पष्टीकरण या सबूत पेश करने में विफल रहे।

विभाग की दो टूक

मोतिहारी पुलिस का कहना है कि किसी भी पुलिस कर्मी का इस तरह से सार्वजनिक तौर पर अनाधिकृत बयानबाजी करना विभागीय प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्दी में रहकर इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहले से ही प्रदेश में एक संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है, ऐसे में पुलिस बल के किसी सदस्य का इसमें सीधे तौर पर शामिल होकर बयान देना विभाग की छवि के लिए चुनौती बन गया था। फिलहाल, सिपाही का निलंबन इस पूरे मामले में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि विभागीय अनुशासन सर्वोपरि है और सेवा शर्तों का उल्लंघन करने वाले किसी भी कर्मी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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