अमेरिका और ईरान की डील से भारतीय बाजार में मचेगी हलचल, इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर व्यापार 2 महीने पहले 44
अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना है, जिससे भारतीय रिफाइनिंग, गैस और शिपिंग क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में तेजी आ सकती है।

रिफाइनिंग और गैस कंपनियों को होगा बड़ा लाभ

अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के नरम होने की उम्मीद है। नोमुरा और जेफरीज जैसी ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, इस जियोपॉलिटिकल सुधार का सबसे बड़ा फायदा भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को मिलेगा। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलने से शिपिंग ट्रैफिक सामान्य होगा और कच्चे तेल पर लगा रिस्क प्रीमियम घटेगा। इससे बीपीसीएल (BPCL), एचपीसीएल (HPCL) और आईओसी (IOC) जैसी सरकारी तेल कंपनियों के मार्जिन में सुधार होगा। जेफरीज का मानना है कि मिड-ईस्ट संकट के दौरान इन शेयरों में आई भारी गिरावट अब एक अच्छा निवेश अवसर प्रदान कर रही है। इसके अलावा, कच्चे तेल की लागत घटने से आईजीएल (IGL), एमजीएल (MGL) और गुजरात गैस (Gujarat Gas) जैसी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के मुनाफे में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

चाबहार पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की बदलेगी तकदीर

इस शांति समझौते ने भारत के रणनीतिक चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को नई ऊर्जा दी है। इस परियोजना में भारत ने 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इस डील के बाद इरकॉन इंटरनेशनल (IRCON International) जैसी कंपनियों के लिए सेंट्रल एशिया और रूस तक व्यापार सुगम हो जाएगा, जिससे इनके शेयरों में तेजी की संभावना है। वहीं, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएंगे। माल ढुलाई और बीमा लागत में कमी आने से शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) को सीधा लाभ होगा।

फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खुलेंगे नए रास्ते

ईरान पर लगे प्रतिबंध हटने से डॉलर पेमेंट चैनल फिर से शुरू हो जाएंगे, जिससे सन फार्मा (Sun Pharma), डॉ. रेड्डीज (Dr. Reddy’s) और सिप्ला (Cipla) जैसी फार्मा कंपनियों के लिए ईरान में दवाओं की सप्लाई का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही, युद्ध से प्रभावित ईरान के पुनर्निर्माण कार्य में एलएंडटी (L&T), थर्मैक्स (Thermax) और भेल (BHEL) जैसी कंपनियों को भारी ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

इन बातों का रखें ध्यान

हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि सिक्के का दूसरा पहलू भी है। कच्चे तेल की कीमतें गिरने से ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया (Oil India) जैसी कंपनियों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि तेल सस्ता होने से उनकी प्रति बैरल आय घट जाएगी। यह पूरा घटनाक्रम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है, लेकिन निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि अभी 60 दिनों की अंतिम बातचीत का दौर जारी है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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