उत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले
2
विचारों
सुरक्षा का कवच और मालगाड़ियों की तेज रफ्तार
भारत के सबसे व्यस्ततम रेल मार्गों में गिना जाने वाला दिल्ली-हावड़ा रूट अब एक नई तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था से लैस हो रहा है। मालगाड़ियों की गति को बढ़ाने और पटरी पर आने वाले बेजुबान जानवरों की जान बचाने के उद्देश्य से रेलवे ने एक बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से गुजरने वाले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCC) के करीब 120 किलोमीटर के हिस्से में मजबूत सीमेंटेड दीवार खड़ी करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस सुरक्षा दीवार के निर्माण से जहां एक ओर वन्यजीवों और मवेशियों को ट्रैक पर आने से रोका जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर मालगाड़ियों का संचालन भी बिना किसी बाधा के सुनिश्चित हो पाएगा।
संवेदनशील इलाकों के लिए सुरक्षा चक्र
मिर्जापुर जिले की भौगोलिक स्थिति और जंगलों की मौजूदगी को देखते हुए, डीएफसीसी प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। जिले में इस कॉरिडोर का कुल 120 किलोमीटर का दायरा आता है। रेलवे की योजना उन सभी संवेदनशील स्थानों पर सीमेंटेड दीवार लगाने की है, जहां जंगल का क्षेत्र पड़ता है या जहां वन्यजीवों के ट्रैक पर आने का खतरा अधिक रहता है। दीवार बन जाने के बाद मवेशियों और जंगली जानवरों के लिए ट्रैक तक पहुंचना असंभव हो जाएगा, जिससे रेल हादसों में कमी आएगी। इससे मालगाड़ियों के आवागमन में आने वाली रुकावटें भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी, जो कि लंबे समय से रेलवे के लिए एक चुनौती बनी हुई थीं।
दिल्ली-हावड़ा रूट का बढ़ता महत्व
दिल्ली-हावड़ा रेल रूट को देश की जीवनरेखा माना जाता है। इस मार्ग पर ट्रेनों का भारी दबाव रहता है, जिसे कम करने के लिए विशेष रूप से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। मिर्जापुर जिले का हिस्सा भी इसी महत्वपूर्ण योजना का एक अभिन्न अंग है। यहां रेलवे ने पटरियां बिछाने का कार्य पहले ही पूर्ण कर लिया है और वर्तमान में इन पटरियों पर मालगाड़ियों की आवाजाही भी शुरू हो चुकी है। अब केवल उन सुरक्षात्मक पहलुओं पर काम किया जा रहा है, जो भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या देरी को रोकने के लिए जरूरी हैं।
1.28 लाख करोड़ की लागत वाली महत्वाकांक्षी परियोजना
यह पूरा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना करीब 1.28 लाख करोड़ रुपये की विशाल लागत से तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत देश भर में 2800 किलोमीटर लंबा विशेष रेल कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के दबाव से अलग करना है। जब यह परियोजना पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगी, तब कोयले की ढुलाई के साथ-साथ अन्य माल ढुलाई में अभूतपूर्व तेजी आएगी। इससे मुख्य दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर भी यात्री ट्रेनों का संचालन पहले से अधिक सुगम और तेज हो सकेगा। अंततः, इसका सीधा लाभ भारतीय रेलवे के राजस्व में होने वाली उल्लेखनीय वृद्धि के रूप में देखने को मिलेगा।
प्रतिदिन 115 ट्रेनों का संचालन और लोकार्पण की तैयारी
मिर्जापुर जिले के भीतर से प्रतिदिन लगभग 110 से 115 मालगाड़ियां इस कॉरिडोर का उपयोग कर रही हैं। माल ढुलाई को सुचारू बनाने के लिए मिर्जापुर और डगमगपुर में दो विशेष स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं। रेलवे की जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, सीमेंटेड दीवार लगाने का कार्य पूरी सावधानी के साथ किया जा रहा है ताकि वन्यजीवों और रेल यातायात दोनों को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि डीएफसीसी कॉरिडोर पर मालगाड़ियों का संचालन वर्तमान में पूरी तरह से सफल और सुचारू है, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसके लोकार्पण की प्रक्रिया अभी शेष है, जिसकी तैयारी रेलवे द्वारा की जा रही है।
Comments
0 comment