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एक घंटा पहले
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विचारों
मक्का पैक्ट का वादा और पाकिस्तान की चुप्पी
यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में सऊदी अरब के आरामको तेल ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इस भीषण हमले में 70 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने एक बार फिर सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए बहुचर्चित मक्का पैक्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रक्षा समझौते में स्पष्ट दावा किया गया था कि इनमें से किसी भी देश पर हुआ हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और वे संयुक्त रूप से इसका जवाब देंगे।
शहबाज और मुनीर की सीमित प्रतिक्रिया
सऊदी अरब पर हुए इस बड़े हमले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बयान जारी करने तक ही खुद को सीमित रखा है। उनके इस रवैये को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की तीखी आलोचना हो रही है। जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था, ईरान के साथ खराब होते संबंधों के डर और कूटनीतिक दबाव के चलते हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। हूतियों से उपजे खतरे के बीच पाकिस्तान का यह मौन स्पष्ट रूप से मक्का पैक्ट के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
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