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एक घंटा पहले
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मिडिल ईस्ट संकट के बीच ट्रंप का आक्रामक रुख
न्यूयॉर्क में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक में डोनाल्ड ट्रंप का वही पुराना और बेबाक अंदाज फिर देखने को मिला। अरब और खाड़ी देशों के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के प्रति अपना समर्थन खुलकर जाहिर किया। मिडिल ईस्ट के मौजूदा गंभीर संकट पर चर्चा करने के लिए आयोजित इस बहुपक्षीय बैठक में ट्रंप ने एर्दोगन को अपना एक बेहद खास दोस्त करार दिया। उन्होंने वहां मौजूद तमाम वैश्विक नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी एर्दोगन से उलझने या उनसे पंगा लेने की गलती न करे।
एर्दोगन को बताया बेहद सख्त मिजाज नेता
ट्रंप ने मंच से एर्दोगन की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक टफ कुकी यानी बेहद सख्त और मजबूत इरादों वाला नेता बताया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि एर्दोगन का व्यक्तित्व काफी शानदार है और उनके साथ किसी को भी टकराव नहीं लेना चाहिए। इस दौरान ट्रंप ने अनुवाद की प्रक्रिया को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी भी ली। यह बैठक ऐसे नाजुक समय में हुई है जब पूरा खाड़ी क्षेत्र तनाव की आग में झुलस रहा है और वहां शांति बहाली की कोशिशें जारी हैं।
तुर्किए हाउस में मंथन और कूटनीतिक हल
बैठक के समापन के बाद न्यूयॉर्क स्थित तुर्किए हाउस के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस पूरी चर्चा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस उच्चस्तरीय बैठक में करीब आठ देश शामिल थे जो खाड़ी संकट के समाधान के लिए एक साथ मिलकर काम करने के लिए सहमत हुए हैं। एर्दोगन ने उम्मीद जताई कि इन कूटनीतिक प्रयासों के सकारात्मक और ठोस नतीजे जल्द ही सबके सामने आएंगे।
खाड़ी तनाव को लेकर नई कूटनीतिक दिशा
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से अलग आयोजित इस बैठक में कई दिग्गज नेता मौजूद थे। ट्रंप ने इराकी प्रधानमंत्री, जॉर्डन के शाह, कतर के अमीर और सीरियाई राष्ट्रपति जैसे प्रभावशाली नेताओं की उपस्थिति में एर्दोगन की नेतृत्व क्षमता का गुणगान किया। उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया कि तुर्की के राष्ट्रपति एक ऐसे नेता हैं जो अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग रहते हैं और उनसे उलझना किसी के लिए भी ठीक नहीं होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी देशों और तुर्की के बीच बढ़ रहा यह नया तालमेल क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित हो सकता है। एर्दोगन ने भरोसा जताया कि तुर्की, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय मुल्क मिलकर खाड़ी क्षेत्र की जटिल समस्याओं को सुलझाने में जल्द ही सफल होंगे। इस बैठक ने मिडिल ईस्ट के कूटनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं।
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