मऊ में इजरायली तकनीक का कमाल, मात्र ₹1.40 में मिल रहे सब्जियों के पौधे, खेती की लागत होगी बेहद कम उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 120
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में उद्यान विभाग इजरायली तकनीक से रोगमुक्त और स्वस्थ पौधे तैयार कर रहा है। बाजार से बेहद कम दामों पर मिलने वाले इन पौधों से किसानों की लागत घटेगी और पैदावार बढ़ेगी।

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के किसानों के लिए एक बहुत ही अच्छी और फायदे की खबर सामने आई है। अब किसानों को सब्जियों की उन्नत खेती करने के लिए महंगे पौधों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मऊ के चन्द्रभानपुर स्थित राजकीय अलंकृत उद्यान, जिसे मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी कहा जाता है, में एक खास पहल की शुरुआत की गई है। यहां पर आधुनिक इजरायली तकनीक की मदद से सब्जियों के बेहतरीन और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा रहे हैं।

आमतौर पर किसानों को अपनी फसलों के लिए बाजार से महंगे दाम पर पौधे खरीदने पड़ते हैं। बाजार में एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹10 से ₹15 तक होती है, जिससे किसानों की खेती की शुरुआती लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन राजकीय अलंकृत उद्यान में तैयार किए जा रहे ये पौधे किसानों को केवल ₹1.40 से लेकर ₹2.70 की बेहद मामूली कीमत पर मिल जाएंगे। उद्यान विभाग का उद्देश्य जिले में उन्नत और वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ावा देना है ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके।

किस पौधे के लिए कितनी चुकानी होगी कीमत?

उद्यान विभाग के अरुण कुमार यादव ने इस योजना और पौधों की कीमतों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग सब्जियों के पौधों को तैयार होने में अलग-अलग समय लगता है। उदाहरण के लिए, बेल वाली या लतावर्गीय सब्जियों के पौधे मात्र 25 से 28 दिन के भीतर तैयार हो जाते हैं, जबकि अन्य वर्ग की सब्जियों के पौधों को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 30 से 32 दिन का समय लगता है।

विभिन्न प्रकार के पौधों के लिए तय की गई दरें इस प्रकार हैं:

  • टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी और पत्तागोभी: सोलानेसियस और क्रूसीफेरी वर्ग की इन सब्जियों के पौधों के लिए किसानों को ₹2 प्रति पौधे की दर से बुकिंग करानी होगी, जबकि विभाग के बीज से तैयार होने वाले पौधों की दर ₹1.75 प्रति पौधा तय की गई है।
  • लतावर्गीय या बेल वाली सब्जियां: करेला, लौकी, कद्दू, खरबूजा, तरबूज और तोरई जैसी बेल वाली सब्जियों के पौधे यदि विभाग के बीज से तैयार होते हैं, तो वे ₹2.70 प्रति पौधा मिलेंगे। हालांकि, यदि किसान अपनी पसंद का खुद का बीज लेकर आता है, तो विभाग उसे मात्र ₹1.40 प्रति पौधे की दर से पौधा तैयार करके सौंप देगा।

आधुनिक इजरायली तकनीक के बड़े फायदे

इस विशेष इजरायली तकनीक से तैयार किए गए पौधों की कई बड़ी विशेषताएं हैं, जो पारंपरिक नर्सरी के पौधों में देखने को नहीं मिलतीं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये पौधे पूरी तरह से रोगमुक्त होते हैं, जिससे फसल में बीमारियां लगने का खतरा बेहद कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, इन पौधों की अन्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • ये पौधे बहुत तेजी से विकसित होते हैं और इनमें बहुत जल्दी फल आने शुरू हो जाते हैं, जिससे किसानों को समय से पहले फसल मिल जाती है।
  • इस तकनीक से तैयार पौधों को खेत में इस तरह लगाया जा सकता है कि एक हेक्टेयर के क्षेत्र में सामान्य से अधिक पौधे रोपे जा सकें।
  • अधिक पौधों की रोपाई होने के कारण कुल उत्पादन में भारी वृद्धि होती है, जिससे किसानों का मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।
  • उद्यान विभाग किसानों की मांग और मौसम के अनुसार पूरे साल अलग-अलग समय पर इन पौधों को तैयार करने की क्षमता रखता है।

बुकिंग के लिए इस दस्तावेज की होगी जरूरत

यदि आप भी एक किसान हैं और इस बेहतरीन सरकारी योजना का लाभ उठाकर अपनी खेती की लागत को आधा से भी कम करना चाहते हैं, तो आप मऊ के उद्यान विभाग से संपर्क कर सकते हैं। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ आसान नियम बनाए गए हैं:

  • किसानों को पौधे प्राप्त करने के लिए अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • पंजीकरण और बुकिंग प्रक्रिया के लिए किसानों को अपने साथ अपना आधार कार्ड लेकर जाना होगा।
  • आने वाले सीजन में हाइब्रिड (संकर) सब्जियों की अच्छी पैदावार के लिए किसान समय रहते विभाग को अपने बीज सौंपकर बुकिंग पक्की करा सकते हैं।

इस सरकारी पहल से मऊ और इसके आस-पास के क्षेत्रों के किसानों को बाजार के अतिरिक्त खर्चों से बड़ी राहत मिलने वाली है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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