हिमाचल प्रदेश
7 घंटे पहले
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वाहनों की फिटनेस जांच के लिए नया बदलाव
हिमाचल प्रदेश में वाहनों की पासिंग और फिटनेस जांच की प्रक्रिया में एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया गया है। अब मंडी जिले के कांगू में राज्य का दूसरा एटीएस यानी ऑटोमेटिड टेस्टिंग सेंटर शुरू कर दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अब वाहन चालक अपनी सुविधानुसार समय स्लॉट बुक करके अपने वाहनों की जांच करवा सकते हैं, जिससे आरटीओ कार्यालयों के बार बार चक्कर काटने की समस्या से राहत मिलेगी।
क्या है यह एटीएस सिस्टम
एटीएस का पूर्ण रूप ऑटोमेटिड टेस्टिंग सेंटर है। यह एक ऐसी आधुनिक व्यवस्था है जहां वाहनों को मानवीय हस्तक्षेप के बिना कंप्यूटराइज्ड तरीके से परखा जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों पर आधारित होती है। जब कोई वाहन इस सेंटर पर पहुंचता है, तो सबसे पहले निर्धारित मानकों के आधार पर उसकी बाहरी जांच की जाती है। यदि वाहन में कोई स्पष्ट कमी दिखाई देती है, तो उसे ठीक करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बाद, वाहन को एक विशेष कंप्यूटराइज्ड रैंप पर चढ़ाया जाता है जहां कंप्यूटर पूरी गाड़ी को स्कैन करता है। इस प्रक्रिया में गाड़ी के अंदरूनी पुर्जों और तकनीकी स्वास्थ्य का सटीक आकलन होता है। यदि मशीन द्वारा किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी पकड़ी जाती है, तो वाहन को फिटनेस पासिंग नहीं दी जाती है।
वर्तमान में मंडी और कांगड़ा में सुविधा
आरटीओ मंडी के नवीन शर्मा ने इस नई व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कांगू स्थित सेंटर पर मुख्य रूप से सुंदरनगर उपमंडल के अंतर्गत आने वाले वाहनों की फिटनेस जांच की जा रही है। हालांकि, यह सुविधा केवल उन्हीं तक सीमित नहीं है। जो अन्य वाहन चालक स्वेच्छा से अपनी गाड़ी की तकनीकी स्थिति की जांच करवाना चाहते हैं, वे भी यहां आकर अपना स्लॉट बुक करवा सकते हैं और इस अत्याधुनिक सेवा का लाभ उठा सकते हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के केवल दो जिलों, कांगड़ा और मंडी में ही यह सुविधा उपलब्ध है।
भविष्य की योजनाएं और नियम
फिलहाल पूरे प्रदेश में इस तकनीक से वाहनों की पासिंग अनिवार्य नहीं की गई है। अभी भी लोग अपने क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक और मैनुअल तरीके से वाहनों की पासिंग करवा सकते हैं। लेकिन केंद्र सरकार की भविष्य की योजना के अनुसार, आने वाले समय में देश भर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे केंद्रों का जाल बिछाया जाएगा। जब ये केंद्र हर जगह स्थापित हो जाएंगे, तो सभी वाहनों के लिए इसी स्वचालित प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य हो जाएगा। तब तक के लिए, यह एक वैकल्पिक लेकिन बेहतर विकल्प के रूप में काम कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार, जब तक कंप्यूटर स्कैनिंग रिपोर्ट में ग्रीन सिग्नल नहीं देता, तब तक किसी भी वाहन को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकेगा। यह तकनीक मानवीय भूलों को कम करने और सड़क पर केवल तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहनों को ही उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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