मंडी से पधर हाईवे बनकर तैयार: धर्मशाला से मनाली का सफर हुआ आसान, 545 करोड़ की लागत से समय से 5 महीने पहले पूरा हुआ काम हिमाचल प्रदेश 2 महीने पहले 68
पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे पर मंडी से पधर के बीच 19 किलोमीटर का हिस्सा बनकर तैयार हो गया है, जिससे सफर का समय 1 घंटे से घटकर मात्र 25 मिनट रह गया है।

हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पहाड़ी रास्तों पर सफर करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी और बेहद राहत भरी खबर आई है। सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले पठानकोट से मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) का मंडी से पधर के बीच का 19 किलोमीटर लंबा हिस्सा बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। इस आधुनिक सड़क मार्ग के निर्माण पर कुल 545 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस नवनिर्मित राजमार्ग के शुरू होने से न केवल धर्मशाला से मनाली के बीच की दूरी कम हो जाएगी, बल्कि लोगों का सफर भी काफी आरामदायक और सुगम हो जाएगा। इस शानदार मार्ग को सुरक्षा जांच के तुरंत बाद आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

तय समय से पांच महीने पहले तैयार हुआ राजमार्ग

इस परियोजना से जुड़ी सबसे बड़ी और उल्लेखनीय बात यह है कि इसका निर्माण कार्य अपनी निर्धारित समय सीमा से करीब पांच महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए निविदा (टेंडर) 20 जुलाई 2022 को आवंटित की गई थी, जिसके बाद जमीनी स्तर पर काम की शुरुआत 4 नवंबर 2024 को की गई थी। एनएचएआई (NHAI) द्वारा इस परियोजना को पूरा करने के लिए नवंबर 2026 की समय सीमा निर्धारित की गई थी। लेकिन इस मार्ग के निर्माण का जिम्मा संभालने वाली गावर कंपनी ने बेहतरीन कार्यकुशलता का परिचय देते हुए इसे निर्धारित अवधि से पांच महीने पहले ही बनाकर तैयार कर दिया।

यह पूरा प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की मंडी इकाई के अधिकार क्षेत्र में तैयार किया गया है। वहीं, इस पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग के शेष हिस्से का कार्य पालमपुर इकाई द्वारा संभाला जा रहा है। पधर से लेकर पठानकोट तक के बाकी बचे हिस्से में भी काम तेजी से चल रहा है, जबकि कुछ संवेदनशील स्थानों पर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

दूरी और समय दोनों में हुई बड़ी बचत

नए राजमार्ग के निर्माण से मंडी और पधर के बीच की दूरी में पौने चार किलोमीटर (3.75 किलोमीटर) की बड़ी कमी आई है। पहले इन दोनों स्थानों के बीच की कुल दूरी लगभग 23 किलोमीटर थी, जो अब सिमटकर केवल 19 किलोमीटर रह गई है। इसके अलावा, पुराने मार्ग के खतरनाक और घुमावदार मोड़ों को सीधा और सपाट किया गया है, जिससे वाहन चालकों को टेढ़े-मेढ़े रास्तों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा।

इस नए और चौड़े मार्ग की बदौलत अब मंडी से पधर की दूरी को केवल 25 मिनट में तय किया जा सकेगा। इससे पहले, इस पहाड़ी और संकरे रास्ते को पार करने में वाहन चालकों को लगभग एक घंटे का लंबा समय लग जाता था। इस नए और आधुनिक मार्ग की कुल चौड़ाई 12 मीटर रखी गई है, जिससे दो बड़े वाहनों को एक साथ गुजरने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

24 पुलों का निर्माण और सामरिक दृष्टिकोण से महत्व

इस 19 किलोमीटर लंबे दुर्गम पहाड़ी रास्ते को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए कुल 24 छोटे और बड़े पुलों का निर्माण किया गया है। इसमें 5 बड़े पुल हैं, जबकि 19 छोटे पुल शामिल हैं। ये सभी पुल न केवल सामान्य दिनों में सफर को आसान बनाएंगे, बल्कि भारी बरसात और मानसून के मौसम में भी भूस्खलन जैसी आपदाओं के दौरान यातायात को बिना किसी बाधा के चालू और सुरक्षित रखने में मददगार साबित होंगे।

यह मार्ग भारतीय सेना के बड़े और भारी वाहनों की सुगम आवाजाही के लिए भी सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही, यह कांगड़ा और मंडी घाटी के पर्यटन उद्योग के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी।

सुरक्षा ऑडिट और अंतिम चरण का काम तेजी पर

एनएचएआई (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी ने बताया कि इस नवनिर्मित राजमार्ग पर सुरक्षा निरीक्षण का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए गावर कंपनी और एनएचएआई की विशेषज्ञ तकनीकी टीमें संयुक्त रूप से पूरे मार्ग की बारिकी से जांच कर रही हैं। यदि निरीक्षण के दौरान सड़क या पुलों में कोई कमी या खामी पाई जाती है, तो निर्माण कंपनी को उसे तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए जाएंगे। पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद ही इस मार्ग पर वाहनों की नियमित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी।

दूसरी ओर, गावर कंपनी के जनरल मैनेजर (GM) विकास नागर ने बताया कि राजमार्ग का लगभग सारा मुख्य काम पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में केवल एक अंतिम पुल पर स्लैब डालने का काम चल रहा है, जिसे आने वाले 10 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि तकनीकी टीमों द्वारा किए जा रहे निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां या सुझाव सामने आएंगे, उन पर तुरंत अमल करते हुए उन्हें ठीक कर दिया जाएगा ताकि आम जनता को एक सुरक्षित और बेहतरीन सड़क मार्ग मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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