दिल्ली: जलेबी के लिए विवाद में हलवाई की हत्या, 12 साल बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा दिल्ली 2 महीने पहले 80
दिल्ली में साल 2014 में जलेबी की कतार को लेकर हुए मामूली विवाद में एक व्यक्ति ने मिठाई विक्रेता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मामूली बात पर गई जान

राजधानी दिल्ली में एक बेहद हैरान कर देने वाली वारदात सामने आई है। महज जलेबी परोसने में हुई देरी और कतार तोड़ने को लेकर हुए विवाद के चलते एक हलवाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस पूरे मामले में न्याय मिलने में 12 साल का लंबा वक्त लगा है। अदालत ने अब अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को उम्रकैद की सजा का ऐलान किया है। यह सनसनीखेज घटना 18 फरवरी 2014 को बांग्ला साहिब गुरुद्वारे के पास स्थित एक मिठाई की दुकान पर घटी थी। जब मिठाई विक्रेता ने आरोपी को लाइन तोड़कर पहले जलेबी देने से इनकार किया, तो आरोपी ने अपना आपा खो दिया। पहले उसने हलवाई को थप्पड़ जड़ा और फिर अपनी पिस्तौल निकालकर उसके सिर में बेहद करीब से गोली मार दी।

गोलीबारी के पीछे का घटनाक्रम

इस पूरे मामले की सुनवाई एडिशनल सेशन जज धीरेंद्र राणा की अदालत में चल रही थी। कोर्ट ने नीरज नाम के व्यक्ति को इस जघन्य अपराध के लिए दोषी माना। उसे इसी महीने की शुरुआत में भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 302 (हत्या) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया गया था। 8 जून को जारी किए गए अपने आदेश में न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि पूरी वारदात केवल इस बात को लेकर हुई थी कि आरोपी चाहता था कि कतार में लगे अन्य ग्राहकों को छोड़कर उसे पहले जलेबी दी जाए। जब विक्रेता ने नियम का पालन करते हुए ऐसा करने से मना किया, तो आरोपी ने हिंसा का रास्ता चुना और उसकी जान ले ली।

कोर्ट की टिप्पणी और सजा का आधार

घटना के तुरंत बाद पीड़ित को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोट के कारण उसकी मौत हो गई। मौके पर ही मौजूद लोगों ने आरोपी नीरज को पकड़ लिया था। जांच के दौरान उसके पास से एक फर्जी हथियार लाइसेंस भी बरामद किया गया था। जज ने सजा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने नरमी बरतने वाली सभी परिस्थितियों पर गौर किया है। अदालत ने माना कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह ट्रायल के दौरान काफी समय से हिरासत में है। जज के अनुसार, आरोपी के परिवार में उसकी पत्नी और दो बच्चे हैं, इसलिए उसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' यानी सबसे दुर्लभ मामलों की श्रेणी में नहीं रखा गया है। अंत में अदालत ने उसे हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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