तृणमूल को एक और बड़ा झटका, पूर्व मंत्री मानस रंजन भुंइया ने पार्टी से दिया इस्तीफा पश्चिम बंगाल एक घंटा पहले 2
विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ममता सरकार में मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता मानस रंजन भुंइया ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौतियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के लिए ताजा झटका तब आया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता मानस रंजन भुंइया ने पार्टी से नाता तोड़ लिया। भुंइया ने शनिवार को पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने सभी संगठनात्मक पदों और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की घोषणा कर दी।

6 बार कांग्रेस के टिकट पर भी जीत चुके हैं भुंइया

भुंइया ने स्वयं इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अपने रिश्ते समाप्त करने का निर्णय ले लिया है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले की सबांग विधानसभा सीट से 7 बार विधायक रह चुके मानस रंजन भुंइया एक दौर में कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शुमार थे। उन्होंने इस सीट से 6 बार कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। साल 2016 में उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था।

पार्टी छोड़ने की वजह पर खुलकर नहीं बोले

तृणमूल छोड़ने के पीछे की असल वजहों पर भुंइया ने खुलकर कुछ कहने से परहेज किया। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि एक राजनेता अपनी आखिरी सांस तक राजनेता ही बना रहता है और वे अपने अंतिम समय तक सबांग तथा पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए काम करते रहेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे बीजेपी में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने अभी इस संबंध में कोई फैसला नहीं किया है और आगे चलकर निर्णय लेंगे।

हालिया चुनाव में मिली थी हार

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में मानस रंजन भुंइया को बड़ा झटका लगा था। वर्ष 2021 में उन्होंने सबांग सीट से टीएमसी के टिकट पर जीत दर्ज की थी, मगर 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी अमल कुमार पांडा ने उन्हें 11 हजार से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दे दी। इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने मेदिनीपुर सीट से किस्मत आजमाई थी, जहां बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने उन्हें हरा दिया था।

ममता बनर्जी ने बनाया था राज्यसभा सांसद

अपने राजनीतिक सफर में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके भुंइया 2021 तक टीएमसी की ओर से राज्यसभा सांसद भी रहे। इसके बाद ममता बनर्जी सरकार में उन्हें सिंचाई एवं जलमार्ग, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग तथा वस्त्र विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व सौंपा गया था।

बागी खेमे के साथ खड़े दिखे ममता के करीबी सुदीप

दूसरी ओर, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी खेमे के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। बागी सांसदों का यह गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर खुद को संसद में 'असली तृणमूल कांग्रेस' के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग करने की तैयारी में है। लंबे समय तक संसद में ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी रहे सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और बागी टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय के साथ बैठक की। इसके अलावा उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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