राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक विपक्ष की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। जिन ममता बनर्जी ने अब तक कभी कांग्रेस का नेतृत्व मंजूर नहीं किया था, अब वही ममता दीदी सोनिया और राहुल गांधी की अगुवाई को स्वीकार करती नजर आ रही हैं।
टीएमसी और कांग्रेस के बीच प्रदेश से लेकर देश के स्तर तक नए तालमेल की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं। इसकी पहली झलक 8 जून 2026 को नई दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में देखने को मिली थी, जहां ममता बनर्जी को सोनिया गांधी के बगल वाली सीट दी गई थी और दोनों नेताओं के बीच खासी गर्मजोशी नजर आई।
सूत्रों की मानें तो ममता और अभिषेक बनर्जी की सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के साथ हुई मुलाकातों के बाद दोनों दलों के गठजोड़ की संभावनाएं और प्रबल हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के नेतृत्व को स्वीकार किया है।
विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन को नई ताकत देने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके 10 जनपथ स्थित आवास पर भेंट की। इंडिया ब्लॉक की बैठक के करीब एक दिन बाद हुई इस बंद कमरे की मुलाकात को विपक्षी एकता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
आगे की रणनीति पर मंथन
सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच भविष्य की राजनीतिक रणनीति, विपक्षी दलों के आपसी समन्वय और 2029 के लोकसभा चुनावों तक साझा चुनावी समझ बनाने पर विस्तार से बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक अधिक से अधिक सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया गया।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की केंद्रीय भूमिका और नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही विपक्षी दलों के बीच एक व्यापक और दीर्घकालिक चुनावी समझौते की दिशा में भी सहमति बनती दिखाई दे रही है। बेहतर संवाद के लिए दोनों दलों के कुछ वरिष्ठ नेताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपे जाने पर भी विचार हुआ है।
बंद कमरे में क्या हुई चर्चा
बैठक के दौरान संसद के भीतर और बाहर विपक्षी एकजुटता को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रुख अपनाने और सरकार के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार करने पर सहमत हुए हैं।
राहुल गांधी और तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी के बीच आगे भी लगातार संपर्क बनाए रखने का फैसला हुआ है। यह संवाद संसद में, व्यक्तिगत मुलाकातों और फोन के जरिए जारी रह सकता है।
एक दिन प्रवास बढ़ाकर पहुंचीं सोनिया के पास
ममता बनर्जी दरअसल इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली आई थीं, लेकिन सोनिया गांधी से मुलाकात के लिए उन्होंने अपना प्रवास एक दिन बढ़ा दिया। कांग्रेस की ओर से दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें भी साझा की गईं, जिनमें आपसी गर्मजोशी साफ झलक रही थी। टीएमसी की चुनावी हार और पार्टी नेताओं पर कथित हमलों के बाद ममता और सोनिया गांधी की यह पहली अहम बंद कमरे की बैठक मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल में बढ़ा सियासी बवाल
इसी बीच, इस मुलाकात के दौरान पश्चिम बंगाल में सीआईडी द्वारा तृणमूल कांग्रेस मुख्यालय और ममता बनर्जी के आवास के आसपास की गई कार्रवाई ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के नव-नियुक्त संयुक्त महासचिव डेरेक ओ’ब्रायन ने इसे एक्स पर राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस समय ममता बनर्जी दिल्ली में विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए बैठक कर रही थीं, ठीक उसी समय कोलकाता में पार्टी मुख्यालय में जबरन घुसने की कोशिश की गई।
केजरीवाल से भी मुलाकात
दिल्ली प्रवास के दौरान ममता बनर्जी ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी भेंट की। इन बैठकों को विपक्षी खेमे में नए राजनीतिक समीकरणों और 2029 की तैयारी की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है। विपक्षी दलों की कोशिश है कि आगामी चुनावों में भाजपा के सामने एक मजबूत और संगठित चुनौती पेश की जा सके।
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