महाराष्ट्र
एक घंटा पहले
3
विचारों
बीएमसी में जनसंपर्क करार को लेकर मची हलचल
देश की सबसे अमीर नगर निगमों में शुमार बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। विवाद का मुख्य बिंदु महानगरपालिका की गतिविधियों और योजनाओं के प्रचार प्रसार से जुड़ा जनसंपर्क यानी पीआर से संबंधित एक अनुबंध है, जिसकी कीमत लगभग 25 लाख रुपये बताई जा रही है। लंबे समय से 'रन टाइम सॉल्यूशन' नामक एक निजी एजेंसी बीएमसी के लिए जनसंपर्क का जिम्मा संभाल रही है। अब इस एजेंसी के साथ मौजूदा करार को अगस्त 2026 से जुलाई 2027 तक विस्तारित करने का प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसने निगम प्रशासन और राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
मेयर ऋतु तावड़े की सफाई और नाराजगी
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब यह सामने आया कि कंपनी की ओर से बीएमसी में जो पत्र सौंपा गया था, उसमें मेयर ऋतु तावड़े की मंजूरी का उल्लेख किया गया था। इस दावे के सार्वजनिक होते ही मेयर ऋतु तावड़े ने कड़ा रुख अपना लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने न तो इस तरह का कोई पत्र जारी किया है और न ही इस अनुबंध को आगे बढ़ाने के लिए कोई औपचारिक मंजूरी दी है। मेयर ने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया है कि उनके नाम और पद का गलत इस्तेमाल किया गया है।
मेयर ऋतु तावड़े ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह पत्र तुरंत पेश किया जाए जिसमें उनके नाम और मंजूरी का दावा किया गया है। मेयर का सवाल सीधा है कि यदि कोई प्रस्ताव बीएमसी कमिश्नर के हस्ताक्षर से आता है, तो फिर उसमें मेयर की मंजूरी की बात क्यों जोड़ी जा रही है? उन्होंने कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि इस काम को किसी एक ही एजेंसी यानी 'रन टाइम सॉल्यूशन' तक सीमित क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्य को अलग-अलग लोगों या एजेंसियों के माध्यम से भी संपन्न कराया जा सकता है ताकि काम में विविधता और स्पष्टता बनी रहे।
विपक्ष ने साधा निशाना
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष भी हमलावर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमीन पटेल ने बीएमसी प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार किया है। अमीन पटेल का तर्क है कि आम मुंबईकरों के कठिन परिश्रम से जमा किए गए टैक्स के पैसों का उपयोग जमीनी विकास कार्यों के बजाय केवल पीआर और पब्लिसिटी के लिए करना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि बीएमसी को जनता के धन का उपयोग अत्यंत जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए और प्रचार के नाम पर किसी भी तरह की फिजूलखर्ची को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि बीएमसी का अपना 'MyBMC' पोर्टल है, जिसके जरिए निगम के विभिन्न विभागों के कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाती है। मेयर और बीएमसी कमिश्नर के दौरों, कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग से लेकर उसे सोशल मीडिया और पोर्टल पर डालने का काम इसी जनसंपर्क तंत्र के अधीन आता है। स्मरण रहे कि इससे पूर्व भी बीएमसी के पार्षदों और विभिन्न कमेटियों के प्रमुखों को टैबलेट वितरित करने के प्रस्ताव को लेकर निगम में भारी विवाद हुआ था, जो अभी तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
जांच और राजनीतिक गरमाहट
मेयर ऋतु तावड़े ने जोर देकर कहा कि जिस एजेंसी की बात हो रही है, वह उनके मेयर बनने के काफी पहले से बीएमसी के लिए कार्य कर रही है। ऐसे में इस बार के विस्तार प्रस्ताव में उनके नाम का जिक्र होने को वह एक सोची-समझी साजिश मान रही हैं। उन्होंने उस पत्र की विस्तृत जांच कराने का संकल्प लिया है ताकि यह पता चल सके कि किसके इशारे पर उनके नाम का दुरुपयोग किया गया है।
बीएमसी में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता आने के बाद से ही मेयर और उनकी कार्यशैली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। निगम बंगले के नवीनीकरण से लेकर इनोवा कारों की खरीद और अब जनसंपर्क एजेंसी के अनुबंध तक, विवादों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य प्रक्रियागत अनुबंध नहीं है, बल्कि इसके पीछे की राजनीति बीएमसी के गलियारों में और अधिक गरमा गई है। अब देखना यह होगा कि मेयर के नाम के कथित दुरुपयोग के इस मामले में जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलता है।
Comments
0 comment