महराजगंज: निचलौल-बहुआर जंगल मार्ग पर तेंदुए के बढ़ते हमलों से दहशत, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने बदला रास्ता उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 54
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में निचलौल से बहुआर जाने वाले मार्ग पर तेंदुए की लगातार गतिविधियों और हमलों से स्थानीय लोगों में गहरा डर है। जर्जर सड़क और जंगली रास्ते के कारण लोगों ने आवागमन बेहद कम कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां निचलौल से बहुआर को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर तेंदुए की बढ़ती सक्रियता ने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। घने जंगलों के बीच से गुजरने वाली इस सड़क पर हाल के दिनों में तेंदुए के हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद से पूरे इलाके में खौफ का साया मंडरा रहा है। इस मार्ग पर दैनिक रूप से आवागमन करने वाले लोग अब अपने घरों से बाहर निकलने में भी कतराने लगे हैं।

जंगल के रास्ते सफर करना हुआ खतरनाक

निचलौल से बहुआर जाने वाली यह सड़क सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के लिए जीवन रेखा के समान है। यह रास्ता घने जंगल के बीच से होकर गुजरता है और वन क्षेत्र के उस पार बसे दर्जनों गांवों को मुख्य कस्बे से जोड़ता है। इस इलाके के ग्रामीणों के लिए निचलौल एक बेहद महत्वपूर्ण व्यावसायिक और प्रशासनिक केंद्र है, जहां वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी, चिकित्सा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए रोजाना आते-जाते हैं। लेकिन तेंदुए की लगातार बढ़ती गतिविधियों के बाद से इस मार्ग पर पहले जैसी चहल-पहल पूरी तरह से गायब हो चुकी है। अब केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही लोग इस रास्ते का रुख कर रहे हैं।

स्कूली बच्चों और अभिभावकों में बढ़ा डर

इस तेंदुए के आतंक का सबसे बड़ा असर स्थानीय छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले बहुत से स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चे प्रतिदिन इसी जंगल के रास्ते से होकर अपने शिक्षण संस्थानों तक पहुंचते हैं। इनमें से अधिकांश छात्र ऐसे हैं जो साइकिल से सफर तय करते हैं। पहले जहां बच्चे निडर होकर टोलियों में स्कूल जाते थे, वहीं अब उनके मन में तेंदुए के हमले का गहरा डर बैठ गया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों की चिंताएं भी चरम पर हैं।

स्थिति यह हो गई है कि:

  • कई अभिभावक अब खुद अपने बच्चों को स्कूल और कॉलेज छोड़ने और वापस लेने जा रहे हैं।
  • बहुत से छात्रों ने मुख्य मार्ग के बजाय अन्य लंबे और सुरक्षित रास्तों का विकल्प चुन लिया है।
  • शाम के समय ट्यूशन या अन्य कामों से लौटने वाले बच्चों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लग गई है।

शाम ढलते ही थम जाती है सड़क पर चहल-पहल

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पूरे इलाके में अब शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है। पहले जहां देर शाम तक इस सड़क पर लोगों का आना-जाना लगा रहता था, वहीं अब सूरज ढलने से पहले ही लोग अपने घरों की ओर भागने लगते हैं। सड़क पर वाहनों की आवाजाही न के बराबर हो जाती है। पिछले कुछ दिनों में इस मार्ग पर लोगों की सामान्य हलचल में भारी गिरावट देखी गई है। ग्रामीण बताते हैं कि तेंदुए के अचानक हमले की आशंका के कारण लोग अकेले सफर करने से पूरी तरह बच रहे हैं।

जर्जर सड़क ने बढ़ाई राहगीरों की परेशानी

तेंदुए के इस खौफ के बीच, इस सड़क की खस्ताहाल स्थिति ने लोगों की मुसीबतें और अधिक बढ़ा दी हैं। जंगल के भीतर से गुजरने वाला यह मार्ग बेहद जर्जर हो चुका है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिसके कारण वाहन चालकों को बेहद धीमी गति और अत्यधिक सावधानी से गाड़ी चलानी पड़ती है। गड्ढों के कारण इस मार्ग पर किसी भी आपात स्थिति में तेजी से भाग पाना या वाहन को तेजी से निकालना लगभग असंभव हो जाता है। यही वजह है कि लोग इस खतरनाक मार्ग से जाने के बजाय किसी अन्य वैकल्पिक मार्ग का सहारा ले रहे हैं, भले ही उन्हें इसके लिए लंबी दूरी क्यों न तय करनी पड़े।

पहले भी होते रहे हैं जंगली जानवरों के हमले

यह कोई पहला मौका नहीं है जब महराजगंज के इस सीमावर्ती वन क्षेत्र में जंगली जानवरों ने इंसानों पर हमला किया हो। इस इलाके का इतिहास रहा है कि समय-समय पर यहां तेंदुओं और अन्य हिंसक जानवरों के हमले की खबरें आती रहती हैं। जब भी ऐसी कोई घटना घटती है, तो पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन जाता है। इस बार भी तेंदुए के लगातार हमलों ने स्थानीय प्रशासन की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जबकि ग्रामीण डर के साए में जीने को मजबूर हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप