एक की जगह चार का काम एक से, 49 दिनों में 30 जानें गईं—यूपी में बिजली हादसों ने खोली व्यवस्था की पोल उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 21
उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मियों के संगठन ने बिजली विभाग पर बड़ा हमला बोला है। संघ का दावा है कि बीते 49 दिनों में 56 हादसों में 30 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की जान चली गई।

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर संविदा कर्मचारियों के संगठन ने मुखर विरोध शुरू कर दिया है। संगठन ने हाल के हफ्तों में हुए हादसों के आंकड़े सामने रखते हुए विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

हादसों के चौंकाने वाले आंकड़े

संविदा संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र पांडे के अनुसार, बीते 49 दिनों के दौरान राज्य में बिजली से जुड़े 56 भीषण हादसे हुए हैं। इन घटनाओं में 30 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की दर्दनाक मौत हुई, जबकि 26 कर्मी गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांगता का शिकार बन गए।

उपभोक्ता बढ़े, पर अनुभवी कर्मी हटाए गए

संगठन की ओर से बताई गई सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि प्रदेश में डेढ़ करोड़ नए बिजली उपभोक्ता जुड़ने के बाद भी 20 हजार अनुभवी संविदाकर्मियों को सेवा से बाहर कर दिया गया। यानी जब काम का बोझ बढ़ रहा था, तब अनुभवी हाथ घटा दिए गए।

कम कर्मचारियों पर भारी काम

संघ का आरोप है कि जहाँ चार कर्मचारियों की जरूरत होती है, वहाँ सिर्फ एक कर्मी से काम लिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रशिक्षण के अभाव वाले अकुशल लोगों को बिजली की लाइनों पर चढ़ाया जा रहा है। संगठन का मानना है कि इसी लापरवाही के कारण मौतों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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