ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने पर RBI देगा ₹25,000 तक का हर्जाना, जानें कब से लागू होगा नया नियम व्यापार 3 महीने पहले 127
डिजिटल लेनदेन में सुरक्षा को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा, जो 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा।

ऑनलाइन धोखाधड़ी पर RBI की बड़ी पहल

आज के दौर में जब डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ रहा है, ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है। अक्सर लोग अपने बैंक खाते या UPI के जरिए अनधिकृत कटौती का शिकार हो जाते हैं और शिकायत करने के बावजूद उन्हें अपनी पूरी राशि वापस नहीं मिल पाती। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने एक राहत देने वाला नियम तैयार किया है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार हुए खाताधारकों को अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण नियम आगामी 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

इन डिजिटल लेनदेन पर लागू होगा सुरक्षा नियम

भारतीय रिजर्व बैंक का यह नया नियम हर प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर प्रभावी रहेगा। इसके दायरे में UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग के अलावा क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और कार्ड के जरिए किए जाने वाले ऑनलाइन भुगतान भी शामिल हैं। यानी यदि आप किसी भी डिजिटल माध्यम का उपयोग कर रहे हैं और आपके साथ किसी भी प्रकार की वित्तीय धांधली होती है, तो आप इस नए नियम के तहत सुरक्षा का दावा पेश करने के पात्र होंगे।

पूरी राशि की वापसी के नियम और शर्तें

यदि धोखाधड़ी का कारण बैंक की अपनी चूक, सुरक्षा प्रणाली में कमी या तकनीकी खामी है, तो ऐसी स्थिति में ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं मानी जाएगी। ऐसे मामलों में बैंक को पूरी राशि वापस करनी होगी। यह नियम तब भी लागू होगा जब ग्राहक शिकायत करने में असमर्थ रहा हो। यदि फ्रॉड किसी तीसरे पक्ष जैसे पेमेंट ऐप, पेमेंट गेटवे या किसी टेलीकॉम सेवा प्रदाता की गड़बड़ी की वजह से हुआ है, तब भी ग्राहक को अपना पूरा पैसा वापस मिलेगा। हालांकि, इसके लिए एक अनिवार्य शर्त यह है कि धोखाधड़ी की घटना के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को इस बारे में सूचित करना आवश्यक है।

क्या आपकी गलती पर भी मिलेगा मुआवजा?

इस नए दिशानिर्देश की सबसे विशेष बात यह है कि कुछ विशिष्ट स्थितियों में ग्राहक की अनजाने में हुई गलती के बावजूद उसे राहत मिल सकती है। मान लीजिए किसी ने गलती से किसी फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया या किसी के साथ OTP साझा कर दिया, लेकिन उसने तुरंत ही बैंक को सूचित कर दिया और नुकसान की राशि एक तय सीमा के अंदर है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है। हालांकि, यदि बैंक यह प्रमाणित कर देता है कि ग्राहक ने सभी चेतावनियों को नजरअंदाज किया है या घोर लापरवाही बरती है, तो जिम्मेदारी ग्राहक पर तय हो सकती है।

मुआवजे की गणना और सीमा

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में पात्र ग्राहक को हुए कुल नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये, जो भी कम हो, मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। इसे ऐसे समझें कि यदि किसी के साथ 50,000 रुपये की धोखाधड़ी होती है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक का ही मुआवजा प्राप्त होगा। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि यह मुआवजा सुविधा एक व्यक्ति को उसके जीवनकाल में केवल एक बार ही उपलब्ध होगी।

मुआवजे की राशि का भुगतान कौन करेगा?

छोटे फ्रॉड मामलों में मुआवजे का वित्तीय बोझ केवल एक बैंक पर नहीं पड़ेगा। इसमें मुआवजे का बड़ा हिस्सा स्वयं RBI उठाएगा। इसके अलावा, ग्राहक का अपना बैंक और जिस लाभार्थी बैंक के खाते में धोखाधड़ी की रकम स्थानांतरित की गई है, वे भी तय हिस्सेदारी के अनुसार इस नुकसान की भरपाई में योगदान देंगे।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप