संजय झील की सूरत बदलने की तैयारी: एलजी ने किया निरीक्षण, 5,000 नए पेड़ लगाने के आदेश दिल्ली 2 महीने पहले 79
दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने पूर्वी दिल्ली स्थित संजय झील के कायाकल्प की समीक्षा की है और अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर पुनरुद्धार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

संजय झील के कायाकल्प की दिशा में कदम

पूर्वी दिल्ली की ऐतिहासिक संजय झील को उसकी पुरानी रौनक वापस दिलाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने गुरुवार को 52 एकड़ में फैली इस झील और इसके 165 एकड़ के संरक्षित वन क्षेत्र का दौरा कर वहां चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे।

जल आपूर्ति और रख-रखाव पर जोर

निरीक्षण के दौरान एलजी ने झील में पानी की कमी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिए कि डल्लूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से आने वाले साफ पानी की पाइपलाइन की मरम्मत में तेजी लाई जाए। इसके अलावा, झील में जमा खरपतवार और शैवाल को हटाने का काम निरंतर जारी रखने के लिए कहा गया है। तटबंधों को मजबूती देने के लिए जियोटेक्सटाइल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

विकास कार्यों की समयसीमा

परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा:

  • प्रथम चरण (अगस्त 2026 तक): इसमें पानी के चैनलाइजेशन, बायो-स्वेल्स का निर्माण, पैदल रास्तों की मरम्मत और झील से घास हटाने का काम शामिल है।
  • द्वितीय चरण (मई 2027 तक): इसमें बायो-रिमेडिएशन, जल गुणवत्ता में सुधार और ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने के लिए फव्वारे व एरेटर लगाए जाएंगे।

हरियाली बढ़ाने का लक्ष्य

पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एलजी ने क्षेत्र में 5,000 देशी पेड़ लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस इलाके में पहले से ही नीम, अर्जुन, अशोक और पिलखन जैसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिन्हें और अधिक विस्तार दिया जाएगा।

सामुदायिक भागीदारी पर जोर

उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि संजय झील को दिल्ली का एक प्रमुख ब्लू-ग्रीन एसेट बनाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत निजी कंपनियों का सहयोग भी लिया जाएगा ताकि यह क्षेत्र जैव विविधता का एक बेहतरीन केंद्र बन सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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