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एक घंटा पहले
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चेन्नई में सियासी हलचल
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। एक तरफ वामपंथी दल राज्य की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ आगामी उपचुनावों में उन्होंने इसी सरकार के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। वाम दलों के इस दोहरे रुख ने राज्य के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। मंगलवार को वामपंथी दलों ने मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया। राज्य में छह अक्टूबर को होने वाले इन उपचुनावों में अब बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा।
सी.जोसेफ विजय की चुनौती
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इस अप्रत्याशित कदम पर सभी राजनीतिक जानकारों की निगाहें टिकी हैं। ये दल एक तरफ तो सी.जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन चुनावी मैदान में वे उसी सरकार के साथ-साथ अपने पुराने सहयोगी द्रमुक के खिलाफ भी ताल ठोकते नजर आएंगे। मुख्यमंत्री सी.जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके ने इन उपचुनावों के लिए पूर्व विधायक मरगाथम कुमारवेल और पी.सत्यबामा पर दांव लगाया है।
शक्ति प्रदर्शन की रणनीति
उल्लेखनीय है कि मरगाथम कुमारवेल और पी.सत्यबामा मई महीने में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के कुछ दिनों बाद ही अन्नाद्रमुक का दामन छोड़कर टीवीके में शामिल हुए थे। चुनावी पंडित इसे वाम दलों द्वारा अपनी जमीनी ताकत परखने की कवायद के रूप में देख रहे हैं। वाम मोर्चे ने पारंपरिक गठबंधनों से किनारा करते हुए दो आरक्षित सीटों पर टीवीके, द्रमुक और अन्नाद्रमुक के खिलाफ स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
मुकाबला हुआ और भी दिलचस्प
इस फैसले के साथ ही वाम दल टीवीके और द्रमुक के साथ सीधे मुकाबले में आ गए हैं। वाम दलों ने इन दोनों सीटों पर अपने एक-एक उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। माकपा ने मदुरंतकम (एससी) सीट से पी. सुगंती को टिकट दिया है, जबकि भाकपा ने धारापुरम (एससी) विधानसभा क्षेत्र से लक्ष्मणन को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा सीमान की नाम तमिलर काची के प्रत्याशियों के मैदान में आने से यह मुकाबला अब पांच कोणीय हो गया है, जिससे राजनीतिक रोमांच और बढ़ गया है।
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