जेल से कैसे चलता है लॉरेंस बिश्नोई का सिंडिकेट, जानिए अपराधियों की 'बिश्नोई कंपनी' का पूरा सच क्राइम एक घंटा पहले 3
लॉरेंस बिश्नोई ने जेल में रहकर भी अपने आपराधिक साम्राज्य को देश भर में कैसे फैलाया है, इसके पीछे एक संगठित मॉड्यूल सिस्टम है। इस लेख में समझिए कि कैसे गोल्डी बराड़, अनमोल बिश्नोई और रोहित गोदारा जैसे लोग इस नेटवर्क की कमान संभाल रहे हैं।

जेल से संचालित होता है अपराध का बड़ा साम्राज्य

पिछले कुछ वर्षों में देश की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के लिए लॉरेंस बिश्नोई का नाम एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। गंभीर आपराधिक मामलों और सनसनीखेज वारदातों में बार-बार सामने आने वाला यह नाम अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विशाल आपराधिक सिंडिकेट की पहचान बन चुका है। दिलचस्प बात यह है कि लॉरेंस बिश्नोई खुद लंबी अवधि से जेल में बंद है, फिर भी उसका नेटवर्क निर्बाध रूप से सक्रिय है। आखिर जेल की चारदीवारी के भीतर से यह 'बिश्नोई कंपनी' अपना कामकाज कैसे संभालती है और इसके पीछे की ताकत क्या है, यह सवाल हर किसी के मन में है।

जेल का हेडक्वार्टर और नेटवर्क का विस्तार

पुलिस जांच के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने जेल को ही अपने अपराध जगत का मुख्य कार्यालय बना लिया है। पंजाब के एक सामान्य से कॉलेज से राजनीति के जरिए अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला लॉरेंस आज एक बड़े नेटवर्क का संचालक है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मानना है कि लॉरेंस की सफलता का रहस्य उसकी व्यक्तिगत क्षमता नहीं, बल्कि उसका संगठित ढांचा है। वह अलग-अलग राज्यों में फैले अपने छोटे-छोटे मॉड्यूल के माध्यम से काम करता है। जेल के भीतर रहते हुए उसने देश भर के विभिन्न अपराधियों से संपर्क साधा और अपनी पहचान का दायरा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विस्तृत कर लिया।

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की सबसे बड़ी विशेषता इसका विकेंद्रीकृत मॉड्यूल सिस्टम है। इस व्यवस्था में पूरा नेटवर्क एक केंद्र से संचालित नहीं होता, बल्कि राज्यों में अलग-अलग छोटे समूह काम करते हैं। इन समूहों की कार्यप्रणाली ऐसी है कि एक मॉड्यूल में शामिल सदस्य दूसरे मॉड्यूल के सदस्यों से परिचित नहीं होते। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी गुप्त रणनीति के कारण यदि किसी एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ होता है या कोई अपराधी पकड़ा जाता है, तो भी पूरे गिरोह का नेटवर्क सुरक्षित बना रहता है और उस पर कोई विशेष असर नहीं पड़ता।

नेटवर्क के प्रमुख चेहरे

लॉरेंस बिश्नोई के इस आपराधिक साम्राज्य को चलाने में कुछ नाम सबसे अधिक चर्चित हैं। इन लोगों ने गिरोह के विस्तार और उसे मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है।

गोल्डी बराड़

सतिंदरजीत सिंह, जिसे दुनिया गोल्डी बराड़ के नाम से जानती है, लॉरेंस के नेटवर्क का सबसे चर्चित चेहरा रहा है। मूल रूप से पंजाब के फरीदकोट का रहने वाला गोल्डी बराड़ भारत द्वारा घोषित एक कुख्यात आतंकवादी है। वर्ष 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा जाने वाला गोल्डी अब अमेरिका में ठिकाना बनाए हुए है। गोल्डी बराड़ ने मई 2022 में सिद्धू मूसेवाला की हत्या और 2023 में कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से इन घटनाओं की जिम्मेदारी ली थी। उसके विरुद्ध दिल्ली में एक रेस्टोरेंट मालिक से 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने और ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। एफबीआई ने उसके बारे में जानकारी देने वाले के लिए 50,000 डॉलर के इनाम की घोषणा की है। बताया जाता है कि लॉरेंस गिरोह में लंबे समय तक रहने के बाद, 2025 में उसने रोहित गोदारा और काला जठेरी के साथ मिलकर अपना एक अलग गिरोह स्थापित कर लिया है।

अनमोल बिश्नोई

लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई अनमोल बिश्नोई हाल ही में अमेरिका से डिपोर्ट होकर भारत आया है। उसका आपराधिक इतिहास वर्ष 2012 से शुरू होता है जब उसका नाम हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामलों में आया था। पहली बार उसकी गिरफ्तारी 2017 में जोधपुर के एक व्यापारी से वसूली और फायरिंग के मामले में हुई थी। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद 2022 में वह फर्जी पासपोर्ट का उपयोग कर जयपुर से दुबई भाग गया और फिर केन्या होते हुए अमेरिका पहुंचा। सूत्रों के अनुसार, अनमोल बिश्नोई पर देश भर में 31 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से केवल राजस्थान में ही 20 से अधिक मामले हैं। अक्टूबर 2024 में बाबा सिद्दीकी की हत्या में उसे मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। इसके अलावा, सलमान खान के आवास के बाहर फायरिंग और मूसेवाला हत्याकांड में हथियारों की आपूर्ति तथा लॉजिस्टिक्स मुहैया कराने का आरोप भी उसी पर है।

रोहित गोदारा

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का एक और स्तंभ रोहित गोदारा है। राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला रोहित पहले मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था, लेकिन आज वह विदेश से अपना पूरा नेटवर्क नियंत्रित करता है। साल 2010 में अपराध जगत में प्रवेश करने वाले रोहित के खिलाफ अब तक हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और डकैती के 30 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला और कर्णी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की जिम्मेदारी भी रोहित गोदारा ने ही ली थी। अप्रैल 2024 में सलमान खान के घर पर हुई फायरिंग की घटना में भी उसका नाम मुख्य रूप से सामने आया था।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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