टाटा संस का अगला चेयरमैन कौन होगा? एन चंद्रशेखरन की जगह लेने की रेस में तीन बड़े नाम सबसे आगे व्यापार एक घंटा पहले 6
टाटा समूह के वर्तमान चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल तीन दिग्गज इस प्रतिष्ठित पद की दौड़ में प्रमुखता से शामिल हैं।

टाटा समूह में उत्तराधिकार की हलचल

दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के जाने के बाद से ही टाटा समूह के भविष्य को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं। इस बीच समूह के सामने सबसे महत्वपूर्ण कार्य अपने अगले चेयरमैन का चयन करना है। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के वर्तमान चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल अगले साल फरवरी माह में समाप्त होने जा रहा है। इस बड़े पद के लिए अब उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी गई है और टाटा संस तीन प्रमुख कॉरपोरेट हस्तियों के नाम पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

फिलहाल रेस में जिन तीन नामों की चर्चा सबसे अधिक है, उनमें टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन, टाटा संस के कार्यकारी निदेशक एवं समूह सीएफओ सौरभ अग्रवाल और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एमडी एवं सीईओ आशीष चौहान शामिल हैं। हालांकि अभी चयन प्रक्रिया चल रही है और किसी भी अंतिम निर्णय पर मुहर नहीं लगाई गई है। इस पूरी प्रक्रिया में टाटा संस के बोर्ड और समूह को नियंत्रित करने वाले ट्रस्टों की भूमिका निर्णायक रहने वाली है।

सरकार के साथ साझा किए गए नाम

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रक्रिया के तहत उन तीन उम्मीदवारों के नामों से शीर्ष सरकारी नेतृत्व को अवगत करा दिया है। नामों पर गहन विचार-विमर्श और मंथन के बाद ही अंतिम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। हालांकि, इस विषय पर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस की ओर से आधिकारिक रूप से अभी कोई टिप्पणी नहीं की गई है। एन चंद्रशेखरन ने वर्ष 2017 में कार्यभार संभाला था और फिलहाल वह अपना दूसरा पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। उन्होंने अगस्त महीने में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल पूरा होने पर वह खुद को पुनः नियुक्ति के लिए पेश नहीं करेंगे।

रेस में अन्य संभावित दावेदार

भले ही तीन नाम सबसे आगे चल रहे हों, लेकिन आधिकारिक रूप से अभी किसी भी नाम की पुष्टि नहीं की गई है। चर्चाओं के बाजार में कुछ और नाम भी तैर रहे हैं। यदि समिति समय सीमा के भीतर किसी नाम पर आम सहमति नहीं बना पाती है, तो नोएल टाटा स्वयं अंतरिम चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। इनके अलावा टाटा संस की समूह मुख्य डिजिटल अधिकारी आरती सुब्रमण्यन, टाटा मोटर्स के सीईओ शैलेश चंद्र और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा का नाम भी संभावित दावेदारों की सूची में लिया जा रहा है।

आशीष चौहान: एक चौंकाने वाली पसंद

जानकारों का मानना है कि यदि आशीष चौहान का चयन होता है, तो यह टाटा समूह के लिए एक सरप्राइजिंग और साहसी निर्णय होगा। आशीष चौहान वर्तमान में एनएसई के एमडी एवं सीईओ हैं और उनके पास तकनीक, वित्तीय सेवाओं और पूंजी बाजार का लंबा अनुभव है। वह 1990 के दशक में एनएसई की स्थापना करने वाली टीम का हिस्सा रहे थे और 2022 में एनएसई के प्रमुख बनने से पहले उन्होंने बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का नेतृत्व भी किया था।

उनकी शैक्षणिक योग्यता भी बेहद प्रभावशाली रही है। उन्होंने आईआईटी मुंबई से स्नातक और आईआईएम कलकत्ता से प्रबंधन की डिग्री हासिल की है। इससे पहले वह रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक जैसी संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। वर्तमान में वह एनएसई के 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ की प्रक्रिया संभाल रहे हैं, जो भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है। इस आईपीओ के बाद एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे यह बाजार पूंजीकरण के हिसाब से भारत की 10वीं सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी।

क्यों आशीष चौहान की दावेदारी मजबूत है?

सूत्रों के अनुसार, चौहान का अनुभव टाटा समूह के लिए एक बड़ा एसेट साबित हो सकता है। वे न केवल पूंजी बाजार को समझते हैं, बल्कि बड़े संस्थानों के प्रौद्योगिकी-आधारित बदलाव में भी महारत रखते हैं। वह भारत के नियामक वातावरण और नीतिगत ढांचे से पूरी तरह परिचित हैं। हालांकि, उनके सामने चुनौती बहुत बड़ी होगी क्योंकि उन्हें अत्यधिक रेगुलेटेड वित्तीय दुनिया से निकलकर 30 से अधिक विविध व्यवसायों और 10 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले विशाल टाटा समूह की बागडोर संभालनी होगी।

टीवी नरेंद्रन: आंतरिक अनुभव का दम

टीवी नरेंद्रन शुरुआती दिनों से ही इस दौड़ में सबसे मजबूत आंतरिक उम्मीदवार माने जा रहे हैं। उनका टाटा समूह के साथ जुड़ाव 1988 से है और वे पिछले एक दशक से अधिक समय से टाटा स्टील का कुशल नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने स्टील उद्योग के उतार-चढ़ाव, कठिन वैश्विक स्थितियों और यूरोपीय संचालन की जटिलताओं को बहुत ही समझदारी से संभाला है। हालांकि, उनकी चुनौती यह होगी कि वे खुद को स्टील जैसे एक सेक्टर से निकालकर आईटी, ऑटोमोबाइल, विमानन और कंज्यूमर बिजनेस जैसे विविध क्षेत्रों के प्रबंधन के अनुकूल कैसे ढालते हैं।

सौरभ अग्रवाल: वित्तीय रणनीति का केंद्र

टाटा संस के कार्यकारी निदेशक और समूह सीएफओ सौरभ अग्रवाल एक ऐसे विकल्प हैं जो वित्त और रणनीति पर आधारित हैं। वे 2017 में चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान समूह में शामिल हुए थे। उनकी भूमिका पारंपरिक सीएफओ से कहीं अधिक व्यापक है, जिसमें निवेश प्रबंधन, पूंजी आवंटन और पूरे पोर्टफोलियो का अनुकूलन शामिल है। ऐसे दौर में जब टाटा संस को अपनी विभिन्न परियोजनाओं के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता है, सौरभ अग्रवाल की वित्तीय विशेषज्ञता समूह के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।

कुल मिलाकर, टाटा समूह का अगला चेयरमैन कौन होगा, यह आने वाले कुछ महीनों में स्पष्ट हो जाएगा। एक तरफ जहाँ नरेंद्रन और अग्रवाल समूह के भीतर की गहराइयों और कार्यप्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ हैं, वहीं आशीष चौहान का बाहर से आने वाला अनुभव समूह के लिए एक नई दृष्टि लेकर आ सकता है। अब अंतिम फैसला टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड को लेना है, जिस पर पूरे देश के उद्योग जगत की निगाहें टिकी हुई हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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