डिजिटल टैक्स पर डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक, अमेरिका लगाएगा 100 फीसदी टैरिफ व्यापार 2 महीने पहले 71
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा और व्यापार समझौते भी रद्द कर दिए जाएंगे।

डिजिटल टैक्स को लेकर ट्रंप की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश की दिग्गज कंपनियों के बचाव में पूरी तरह आक्रामक रुख अपना चुके हैं। एक ताजा बयान में उन्होंने साफ कर दिया है कि अमेरिका अपने आर्थिक हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी देश अमेरिकी तकनीकी कंपनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लगाने का प्रयास करता है, तो उसे अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। इसमें न केवल उन देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों को रद्द करना शामिल है, बल्कि उन पर 100 फीसदी तक का भारी भरकम टैरिफ भी लगाया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर ट्रंप का ऐलान

सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिकी कंपनियों को लक्षित करने वाले किसी भी डिजिटल टैक्स का अमेरिका कड़ा विरोध करेगा। ट्रंप का मानना है कि ऐसे कदम से न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों का मुनाफा भी प्रभावित होता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कोई राष्ट्र ऐसी कोशिश करता है, तो उस देश से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 100 फीसदी टैरिफ का अतिरिक्त बोझ लाद दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने व्यापार समझौतों को पूरी तरह समाप्त करने की बात कहकर अपनी मंशा साफ कर दी है।

क्या है डिजिटल सर्विस टैक्स?

डिजिटल सर्विस टैक्स मुख्य रूप से उन तकनीकी कंपनियों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो ऑनलाइन विज्ञापन, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और उपयोगकर्ताओं के डेटा का उपयोग करके बड़ी कमाई करती हैं। यूरोपीय देशों ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं और वे चाहते हैं कि दिग्गज टेक कंपनियां वहां भी टैक्स का भुगतान करें, जहां से वे अपनी सेवाएं प्रदान करती हैं या राजस्व कमाती हैं। अमेरिका का लंबे समय से तर्क रहा है कि इस प्रकार का टैक्स विशेष रूप से गूगल, मेटा, ऐपल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुँचाता है।

ब्रिटेन और फ्रांस के साथ पूर्व विवाद

ट्रंप का यह कड़ा रुख दुनिया भर में व्यापारिक तनाव पैदा करने वाला है। पूर्व में भी ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने ऐसी कोशिशें की हैं, जिससे अमेरिका और इन देशों के बीच काफी तनातनी हुई थी। ब्रिटेन ने साल की शुरुआत में ही अमेरिकी टेक कंपनियों पर 2 फीसदी का डिजिटल टैक्स लागू किया था, जिसके जवाब में अमेरिका ने टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। वहीं, फ्रांस ने भी जब अमेरिकी कंपनियों को कर के दायरे में लाने की कोशिश की थी, तो ट्रंप प्रशासन ने फ्रांसीसी शराब और अन्य उत्पादों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी देकर बैकफुट पर धकेल दिया था।

भारत का रुख और ओईसीडी समाधान

भारत ने भी पूर्व में वैश्विक टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स ऑपरेटरों पर 2 फीसदी शुल्क लगाने की बात की गई थी। इसके अलावा, गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों पर, जो ऑनलाइन विज्ञापनों से कमाई करती हैं, उन पर 6 फीसदी टैक्स का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, बाद के घटनाक्रमों में भारत ने इस प्रस्ताव को वापस लेने का निर्णय लिया। वर्तमान में भारत ओईसीडी के टू-पिलर समाधान को अपनाने पर जोर दे रहा है, ताकि द्विपक्षीय बातचीत के जरिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कर वसूली के मसले को सुलझाया जा सके और व्यापारिक विवादों से बचा जा सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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